“प्रात: पानी पिये पेट भर,तब भ्रमण को जाया कर”दिनचर्या को समर्पित एक भजन

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(१)💐🪴🌹🌷
प्रात: पानी पिये पेट भर,
तब भ्रमण को जाया कर।
शौच क्रिया कर,कर नित दांतुन,
उसी समय फिर नहाया कर।
थोड़ा सा व्यायाम करे फिर,
बैठ ईश गुण गाया कर।
तब दुनियादरी में”धर्मी”,
सारा दिवस बिताया कर।

(२)🌹🍁🌲🌸
चार भांति के मिला पदार्थ,
सामग्री तैयार करे।
अग्नि में उसे डाल,डाल कर,
चहूं दिश में मेंहकार करे।
जिसके द्वारा भांति भांति के,
रोगों का निस्सार करे।
यज्ञ हवन का घूम घूम कर,
“धर्मी”जी प्रचार करे।

(३)🍁🌹🪴🌸
ताल यदि आज्ञात हो”धर्मी”
उसमें बढ़कर नहाओ ना।
रांड लुगाई हो जिस घर में,
उस घर निश में जाओ ना।
खीर का भोजन करना है तो,
दही साथ में खो ना।
दिल का रोग लगा हो तन में,
ऊंचे स्वर में गाओ ना।

(४)🌸🍁🙏🌹
धर्म कर्म की देत दुहाई,
नित्य कमाई करता है।
जहां जनों में बैठ जाय,
वहां निजी बढाई करता है।
पशु व पक्षी मारे खावे,
सदा लड़ाई करता है।
“धर्मी”ऐसा पाखंडी,
ना कभी भलाई करता है।