प्रातःकाल संध्या वन्दन, परमेश्वर का ध्यान करो।

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प्रातःकाल संध्या वन्दन, परमेश्वर का ध्यान करो।

प्रातःकाल संध्या वन्दन,
परमेश्वर का ध्यान करो।
जिस मालिक ने जन्म दिया है,
उसका सब गुणगान करो।

उस की दिव्य शरण में आ के।
आत्म समर्पण भाव जगा के।
परम पवित्र परम सुखदायक,
भक्ति रस का पान करो।
प्रातःकाल सन्ध्या वन्दन,
परमेश्वर का ध्यान करो।

पृथ्वी सूरज चाँद सितारे
सभी बनाये न्यारे न्यारे।
चिंतन और मनन से
उस की ताकत का अनुमान करो।

प्रातः काल संध्या वन्दन,
परमेश्वर का ध्यान करो।
सब का सिरजनहार वही है।
रक्षक प्राणाधार वही है।

अपने अन्तःकरण के अन्दर,
गहरा अनुसंधान करो,
प्रातःकाल संध्या वन्दन,
परमेश्वर का ध्यान करो।

कौन तुम्हें बंधन में लावे।
बंधन से फिर कौन छुड़ावे।
कौन बड़ा अधिकारी वह,
जरा जान पहचान करो।

प्रातः काल संध्या वन्दन,
परमेश्वर का ध्यान करो।
बचपन यौवन कौन दिखावे।
तन पर कौन बुढ़ापा लावे।
इस परिवर्तन के कारण का,
हासिल कुछ तो ज्ञान करो।

प्रातःकाल संध्या वन्दन,
परमेश्वर का ध्यान करो।
ऋषियों का पैगाम यही है।
चिंतन का परिणाम यही है।

कर के भजन ‘पथिक’
दुनियां में जीवन का उत्थान करो।
प्रातः काल संध्या वन्दन,
परमेश्वर का ध्यान करो।