(१)🎄🌴🍂🍃
प्राणी मात्र की रक्षा करना,
“धर्मी”धर्म कहाता है।
सुखी मनुष्य वह कहलाता है,
रोग निकट नहीं आता है।
सज्जन जन वह कहलाता है,
सबसे प्रेम निभाता है।
हित अनहित का ध्यान करे,
जो पंडित माना जाता है
(२)🌹🍃
“धर्मी”धन को खूब कामता,
अच्छा खाता पीता है।
शेष बचे तो दान में दे दे,
घर रीते का रीता है।
दान करे ना भोग में लावे,
उसका होय फजीता है।
रात को देवी,पुत्तर आकर,
आन पढावें गीता है।
(३)🌿🌹
जैसे मनुष्य पेट भरता है,
पशु भी वैसे भरता है।
सोता उठता उसी तरह से,
उसी तरह से डरता है।
बच्चों को ज्यूं पालन करता,
पशु भी वैसे करता है।
“धर्मीं”धर्म नहीं करता तो,
भार शीश पर धरता है।
(४)🌹🌿🌿
सौ कामों को तजकर धर्मी,
प्रथम भोजन पान करो।
सहस्त्र काम का त्यागन करके,
पहले नित स्नान करो।
लाखों कार्य छोड़कर अपने,
दीनों को कुछ दान करो।
कोटि कार्यों को तज करके,
याद बैठ भगवान करो।










