प्रकाशित हृदय में ईश्वर भक्त के समाए
साँचा रूप साँचा रंग मन में दिखाए ॥ प्रकाशित हृदय में…
दिव्य रूप तेरी ज्योति । हर दिशा में तेरी कीर्ति
एक ओ३म् का ही ध्यान, मुक्ति पथ दिखाए । सांचा रूप सांचा रंग…
ज्ञानियों के शुद्ध मनों में, साधकों के चिन्तनों में
मेरी आस मेरे श्वास, तुझमें समाये । सांचा रूप सांचा रंग…
तू अनादि तू अनन्त, ध्याएँ ऋषि साधु सन्त
तू ही इन्द्र ब्रह्मा विष्णु, वेद महिमा गाए। सांचा रूप सांचा रंग…
तर्जु: मंदिराच्या अंतरात देव










