प्रभु तुम अणु से भी सूक्ष्म हो, प्रभु तुम गगन से विशाल हो।

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भक्ति

प्रभु तुम अणु से भी सूक्ष्म हो,
प्रभु तुम गगन से विशाल हो।
मैं मिसाल दूँ तुम्हें कौन-सी,
दुनिया में तुम बेमिसाल हो। ।1।।
प्रभु तुम अणु से भी सूक्ष्म हो……

हर दिल में तेरा धाम है,
और न्याय ही तेरा काम है।
सबसे बड़ा तेरा नाम है,
जगन्नाथ हो जगपाल हो।।2।।
प्रभु तुम अणु से भी सूक्ष्म हो…….

तुम साधकों की हो साधना,
या उपासकों की उपासना।
किसी भक्त की मृदुभावना,
या किसी कवि का ख्याल हो। ।3।।
प्रभु तुम अणु से भी सूक्ष्म हो…….

मिले सूर्य को तेरी रोशनी,
खिले चाँद में तेरी चाँदनी।
सब पर दया तेरी पावनी,
प्रभु तुम तो दीन दयाल हो।।4।।
प्रभु तुम अणु से भी सूक्ष्म हो…..

तुझ पर किसी का न जोर है,
तेरा राज्य ही सभी ओर है।
तेरे हाथ सबकी डोर है,
तुम्हीं जिन्दगी तुम्हीं काल हो। ।5।।
प्रभु तुम अणु से भी सूक्ष्म हो……

जो खतम न हो वह किताब हो,
बेशुमार हो बेहिसाव हो।
जिसका कहीं न जवाब हो,
उलझा हुआ वह सवाल हो। ।।6।।
प्रभु तुम अणु से भी सूक्ष्म हो…….