प्रभु प्यारे से जिसका सम्बन्ध है
प्रभु प्यारे से जिसका सम्बन्ध है,
उसको हरदम आनन्द ही आनन्द है।
झूठी ममता से करके किनारा,
लेके सच्चे प्रभु का सहारा।
जो उसकी रजा में रजामन्द है-
उसको हरदम…….
जिसकी कथनी में कोयल-
सी चहक है,
जिसकी करनी में फूलों सी
महक है।
प्रेम नरमी ही जिसकी सुगन्ध है-
उसको हरदम……
३. निन्दा चुगली न जिसको सुहावे,
बुरी संगत की रंगत न भावे।
सत्संग ही जिसको पसन्द है-
उसको हरदम……..
दीन-दुखियों का दुःख जो मिटावे,
बनके सेवक भला सबका चाहे।
नहीं जिसमें घमण्ड और पाखण्ड है-
उसको हरदम…….










