प्रभु नाम के अमृत रस का,
जो प्राणी पान करेगा
उसकी बुद्धि को निर्मल,
निश्चय भगवान करेगा।।
जो सुबह-शाम शुद्ध मन से,
भगवान का ध्यान लगाये
हृदय रूपी दर्पण का सब,
जमा मैल धुल जाये।
सत्संग ज्ञान गंगा में,
मल-मल जो स्नान करेगा।।
विषयों से मन हट जाये,
कर जाये व्यसन किनारा
शुभ कर्मों में मन को लगा ले,
जो चाहे कुछ तू सहारा।
जैसा तू करके जाये,
वैसा भुगतान करेगा।।
सारे जीवन का लेखा,
जब देखेगा न्यायकारी
शुभ-अशुभ कर्म सब तेरे,
आयेंगे सभी अगारी।
राघव वही पार हुआ है,
जो प्रभु गुणगान करेगा ।।










