प्रभु मन में मेरे समाना है, यही वरदान तुझसे पाना है ॥
तर्ज: ज़िन्दगी का अजब फसाना है
प्रभु मन में मेरे समाना है, यही वरदान तुझसे पाना है ॥
तेरे दरबार में रहूँ हरदम, ओ३म् के नाम की गाऊँ सरगम
तेरे गीतों से मन सजाना है ॥ प्रभु मन…
तुझसे पाऊँ मैं फूल या काँटे, दान तेरा समझ लगाऊँ माथे
तेरी आज्ञा को मैंने माना है ॥ प्रभु मन…
तुझ को देखूँ प्रभु मैं हर रंग में, हर समय पाऊँ मैं तुझे संग में
तेरे चरणों की धूल पाना है ॥ प्रभु मन…
होवे बुद्धि पवित्र मन निर्मल, मन हो ना कभी मेरा दुर्वल
मुझे सन्मार्ग में ले जाना है ॥ प्रभु मन…
हाय को जोड़ में करूँ वन्दन, जिन्दगी मेरी तू बना कुन्दन
तेरे मप में इसे तपाना है ॥ प्रभु मन…
तेरी मूरत है मन के मन्दिर में,प्रेम दीपक जलाए अन्तर ने
अव तो तेरा प्रकाश पाना है ॥ प्रभु मन..
(कुन्दन) स्वर्ण, सोना










