प्रभु कैसी अनोखी संसार है
प्रभु कैसो अनोखो संसार है,
कठे खुशियां कठे हा हाकार है।
थांरी रचना रा मारा बापजी,
कोई पायो नी पारावार है ।। टेक ।।
धरती, सूरज, चांद, सितारा,
ऋतुआँ अर डूंगर सारा ।
रंग-बिरंगा फूल सुगंधित
पशु-पंखी न्यारा-न्यारा ।
सारी दुनिया रा थाँ आधार हो,
नमस्कार थाने बार-बार है ।।१।।
खाली पेटी वाळों री
मिनटों में पेटी भर देवो ।
भरियोड़ी पेटी ने भी थें,
झटपट खाली कर देवो ।
जको निर्धन हा वाँ तीरे कार है,
कार वाळा विया बेकार है ।।२।।
दीन-हीन बेचारा भाई
रोवे हेलो पाड़े है।
कपड़ा कोनी, रोटी कोनी,
भीख मांग ने खावै है ।
भजन भाव वां रा बेकार है,
दुखियों री सुणें नी पुकार है ।।३।।
धन वालों ईं धन रे ऊपर
कदी मती अभिमान करो ।
निर्धन दुखिया बीमारों ने अन्न,
धन गाबा दान करो ।
हाँसेय न ईं रो एतबार है,
मिल मालिक वे जाये कर्जदार है ।।४।।
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