प्रभु इस जहान में सजाई कैसी बगिया…देखकर हैरान हूँ

0
12

प्रभु इस जहान में सजाई कैसी बगिया…देखकर हैरान हूँ

तर्ज: मेघा छाए आधी रात

प्रभु इस जहान में सजाई कैसी बगिया…देखकर हैरान हूँ ॥
गन्ध उड़ाए स्वर से गाए पवन हर ले जिया
हँसती गाती बहती जाती प्रेम लहर में नदिया
मिल गया सागर का साथ अजब तेरी दुनिया…..खकर हैरान हूँ ।
प्रभु इस जहान…

सूरज चाँद सितारों ने आधार प्रभु का लिया
सारे विश्व को प्रभु कृपा ने ही प्रकाशित किया
है प्रभु तू सर्वाधार अजब तेरी महिमा….देखकर हैरान हूँ ॥
प्रभु इस जहान…

धरती और आकाश में प्रभु दान अनुपम कीना

मेघ से बरसा के जल को धरती पे ला दीना
हरियाली की क्या है बात हैरत देखे अखियाँ…..देखकर हैरान हूँ ॥
प्रभु इस जहान…

तेरे आश्रित मैं जगत में ज्ञान तुझसे लिया

जो पिलाया ज्ञानामृत वो मस्त हो के पिया,

जो मिली तेरी दया भर आई मेरी अँखियाँ… देखकर हैरान हूँ ॥
प्रभु इस जहान…

मन के मन्दिर में जलाऊँ ओ३म् नाम का दिया

प्रेम आसन पर बिठाऊँ तरसे मेरा जिया
प्रेम ही मेरी सौगात ओ मेरे मन के बसिया….यान तेरा ही धरू
प्रभु इस जहान…

(सर्वाधार) सव जगत का आधार (आश्रित) शरणागत, अवलम्बित (सौगात) भेंट, उपहार