प्रभु दर्शन कहाँ होंगे
तर्ज – भरी दुनियाँ में……
प्रभु दर्शन कहाँ होंगे,
कहाँ ढूंढ़े कहाँ जाये।
बहुत संसार में ढूंढ़,
मगर हम ढूंढ़ ना पाये।।
ये जीवन दे दिया
जिसनें उसे हम ढूंढ़ते
निसदिन वो दिल में
वास करता है “सचिन”
क्यूँ मन ये उलझाये प्रभु दर्शन…….
सुखों की खान है
भगवन दया का है
प्रभु सागर नज़र ना
वो कहीं आता मेरा
तो मन ये घबराये प्रभु दर्शन……
ये सूरज चाँद ये तारे
विधाता ने रचाये हैं
वो ही कलियाँ खिलाता है
वो ही बगिया को महकाये प्रभु दर्शन……
घटा काली ये बादल की
फिज़ा रंगी नजारों की
ये जादू सब उसी का है
सभी के दिल को वो
भाये प्रभु दर्शन……










