प्रभु भक्ति मे मन ने लगावो जी

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प्रभु भक्ति मे मन ने लगावो जी

प्रभु भक्ति में मन ने लगावो जी,
वै सब रा पालन हार है।
दुख दूर करेला मारा बापजी,
सब सुखों रा वे भण्डार है ।। टेक ।।

वीं घर सूँ कोई खाली आवे
ऐसे कदी हो ही न सके ।
सत्‌गुरू जी ने भूल र कोई
सुख सूं कदी सो ही न सके ।
सारी दूनिया रा वे आधार है,
वाँकी महिमा अपरम्पार है ।।१।।

सोनो, चान्दी, कुटुम्ब-कबीलों
साथ थारे नी जावे लो ।
धर्म ज है थारो अन्त रो
साथी साथ थारे जो जावेलो ।
आच्छा कर्मा सूं होवे बेड़ो पार है,
नाव पापी री डूबे मंझधार है ।।२।।

विषयों रा चक्कर में पड़ ने
जीवन ने बरबाद न कर ।
मनख जमारो उत्तम है ओ,
पाप न कर अपराध न कर
हाँसेय प्रभु निराकार है,
वाँ री महिमा रो पायो नी पार है ।। ३ ।।

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