प्रांतीय आर्य वीर दल की शैक्षणिक यात्रा 2026 : वाराणसी मण्डल का प्रेरणादायक आयोजन
परिचय
दिनांक 31 मार्च 2026 को प्रांतीय आर्य वीर दल, पूर्वी उत्तर प्रदेश (वाराणसी मण्डल) द्वारा एक दिवसीय शैक्षणिक यात्रा का सफल आयोजन किया गया। इस यात्रा में लगभग 60 आर्यवीर-वीरांगनाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को काशी की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक धरोहर से परिचित कराना था।
यात्रा का शुभारम्भ : अस्सी घाट
यात्रा का आरम्भ प्रातः 7:00 बजे अस्सी घाट से हुआ। यहाँ विद्यार्थियों को गंगा नदी की महत्ता तथा “वाराणसी” नामकरण का रहस्य (वरुणा + असि) विस्तार से बताया गया।
तुलसी घाट और ऐतिहासिक महत्व
इसके पश्चात् दल तुलसी घाट पहुँचा, जहाँ महान संत गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के इतिहास की जानकारी दी गई।



रानी लक्ष्मीबाई जन्मस्थली
यात्रा के दौरान रानी लक्ष्मीबाई जन्मस्थली पर विद्यार्थियों को रानी लक्ष्मीबाई के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान के बारे में बताया गया, जिससे उनमें देशभक्ति की भावना विकसित हुई।
लोलार्क कुण्ड : प्राचीन वैज्ञानिक प्रणाली
लोलार्क कुण्ड पर विद्यार्थियों को प्राचीन भारतीय जल-संचयन प्रणाली तथा सीढ़ीदार बावड़ी की अभियांत्रिकी के बारे में जानकारी दी गई।
पार्श्वनाथ जन्मस्थली
भेलूपुर स्थित पार्श्वनाथ जन्मस्थली पर विद्यार्थियों को भगवान पार्श्वनाथ के जीवन तथा उनकी शिक्षाओं—अहिंसा, सत्य, अस्तेय और अपरिग्रह—से परिचित कराया गया।
दशाश्वमेध घाट एवं वेधशाला भ्रमण
इसके उपरांत दशाश्वमेध घाट एवं राजेन्द्र प्रसाद घाट का भ्रमण किया गया।
फिर विद्यार्थियों ने जंतर मंतर वेधशाला का अवलोकन किया, जिसे महाराजा जय सिंह द्वितीय द्वारा निर्मित किया गया था। यहाँ प्राचीन खगोलीय यंत्रों के वैज्ञानिक महत्व को समझाया गया।
कैरियर काउंसलिंग : “हम और हमारा भविष्य”
यात्रा का महत्वपूर्ण सत्र गोपी राधा विद्यालय में आयोजित कैरियर काउंसलिंग कार्यक्रम रहा। इस सत्र में प्रो. अखिलेंद्र पाण्डेय ने विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देते हुए बताया कि विषय चयन अपनी रुचि, योग्यता और पारिवारिक परिस्थिति के अनुसार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केवल आर्थिक लाभ नहीं, बल्कि कार्य से संतुष्टि भी आवश्यक है।
सफल आयोजन
यह सम्पूर्ण कार्यक्रम श्री दिनेश आर्य, श्री गौरव आर्य तथा श्री प्रदीप आर्य के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। सभी आर्यवीर-वीरांगनाओं ने अनुशासनपूर्वक यात्रा पूर्ण की और काशी की ऐतिहासिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक धरोहर से महत्वपूर्ण ज्ञान प्राप्त किया।
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