वैदिक विद्या केंद्र
डी.ए.वी. चेन्नई – वेदमृतम् ग्रुप
वैदिक विज्ञान के माध्यम से परिवार नियोजन
वैदिक विद्या केंद्र, पुडुचेरी की स्थापना वैदिक ज्ञान और विज्ञान को समझने और लागू करने में मदद करने के लिए की गई है।
वैदिक विज्ञान का एक प्रमुख अनुप्रयोग बच्चे के नियोजन, गर्भाधान और पालन-पोषण (सोलह संस्कार और आयुर्वेद) में है। वैदिक विद्या केंद्र जोड़ों को हमारे शांत परिसर में इस अवधि (2 वर्ष तक – गर्भाधान से लेकर बच्चे के जन्म के 1 वर्ष बाद तक) को बिताने और व्यवस्थित रूप से अपने परिवार की योजना बनाने का एक अद्वितीय अवसर प्रदान करता है।
हम विवाहित जोड़ों और गर्भवती महिलाओं के लिए 4-दिवसीय दो कार्यशालाओं के साथ इसकी शुरुआत कर रहे हैं!
हम उन सभी को आमंत्रित करते हैं जो इस कार्य से लाभ उठाना चाहते हैं और इसमें योगदान देना चाहते हैं!
“गर्भे एव संस्कारः, भविष्यस्य निर्माणम्।”
कार्यशाला (Workshop) विवरण
| कार्यशाला 1: सचेत परिवार नियोजन | कार्यशाला 2: ‘ध्यान बेबी’ सचेत गर्भ पेरेंटिंग |
| विषय: नए जीवन के लिए तैयारी | विषय: सचेत गर्भ पेरेंटिंग |
| दिनांक: 12 मार्च (गुरुवार) से 15 मार्च, 2026 (रविवार) | दिनांक: 26 मार्च (गुरुवार) से 29 मार्च, 2026 (रविवार) |
| किनके लिए: बच्चे की योजना बना रहे जोड़ों के लिए | किनके लिए: गर्भवती महिलाओं (पतियों के साथ) या देखभाल करने वालों के लिए |
दृष्टिकोण और दर्शन (Vision & Philosophy)
- भारतीय ज्ञान परंपरा में पेरेंटिंग (परवरिश) गर्भधारण से पहले ही शुरू हो जाती है।
- गर्भ को सीखने का पहला पवित्र स्थान माना जाता है, जहाँ बच्चे की भावनात्मक स्थिरता की नींव रखी जाती है।
- यह कार्यक्रम गर्भ संस्कार, उपनिषद, आयुर्वेद और योग शास्त्र जैसे शास्त्रीय ग्रंथों पर आधारित है।
- इसमें कुल 16 में से 8 संस्कारों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है जो वैज्ञानिक और तार्किक हैं।
पंजीकरण और शुल्क (Registration)
- शुल्क: ₹12,000 प्रति जोड़ा (इसमें रहना, खाना और सभी सत्रों में भागीदारी शामिल है)।
- नियम: प्रतिभागियों से अनुशासन बनाए रखने और केंद्र के नियमों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है।
- संपर्क: 93848 12741 / 91764 10164।
- ईमेल: vvk@davchennai.org।
- स्थान: वैदिक विद्या केंद्र कैंपस, माथुर रोड, कालापेट, पुडुचेरी-605014।
वैदिक विद्या केंद्र – कार्यशाला विवरण
दो प्रमुख कार्यशालाएँ (Workshops)
| विवरण | कार्यशाला 1: सचेत परिवार नियोजन | कार्यशाला 2: ध्यान बेबी – सचेत गर्भ पेरेंटिंग |
| उद्देश्य | नए जीवन के लिए तैयारी | सचेत गर्भ पेरेंटिंग (Womb Parenting) |
| दिनांक | 12 मार्च (गुरुवार) से 15 मार्च, 2026 (रविवार) | 26 मार्च (गुरुवार) से 29 मार्च, 2026 (रविवार) |
| किनके लिए | बच्चे की योजना बना रहे जोड़ों के लिए | गर्भवती महिलाओं (पतियों के साथ) के लिए |
कार्यशाला 1 के मुख्य बिंदु (सचेत परिवार नियोजन)
यह कार्यशाला उन जोड़ों के लिए है जो माता-पिता बनने की योजना बना रहे हैं:
- आधार: गर्भाधान संस्कार को समझना—यह केवल एक मेडिकल घटना नहीं बल्कि एक पवित्र संस्कार है।
- जैविक तैयारी: शास्त्र और विज्ञान के अनुसार गर्भाधान का सही समय और हार्मोनल संतुलन की जानकारी।
- आयुष (AYUSH) विज्ञान: परिसर में विशेषज्ञों द्वारा नाड़ी परीक्षण और व्यक्तिगत परामर्श की सुविधा।
- मानसिक और शारीरिक शुद्धि: शरीर और मन के लिए डिटॉक्स (विषहरण) अभ्यास और मंत्र जागरूकता।
- परिणाम: कार्यशाला के अंत तक प्रतिभागी प्रजनन संबंधी समस्याओं को समग्र रूप से समझेंगे और सचेत रूप से जीवन को आमंत्रित करने की ओर बढ़ेंगे।
विशेषज्ञ टीम
- डॉ. एन. कल्याणी जी: मनोवैज्ञानिक और प्रसवपूर्व शिक्षा (Dhyan Baby) की संस्थापक।
- आचार्या नीरजा जी: प्रसिद्ध वैदिक विद्वान और गर्भ संस्कार विशेषज्ञ।
- श्रीमती व्रातिका जी: संचालिका, VVK पुडुचेरी।
- आचार्य सोनेराव जी: अंतर्राष्ट्रीय वैदिक विद्वान।
- मेडिकल विशेषज्ञ: डॉ. शरवनन के. पद्मनाभन (M.B.B.S.) और डॉ. गीतांजलि (योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ)।






कार्यशाला 1 की विस्तृत समय-सारणी (Schedule)
| समय | गतिविधि / सत्र |
| दिन 1 – गुरुवार | आगमन और अभिविन्यास (Arrival & Orientation) |
| 04:00 – 07:00 PM | नाड़ी परीक्षण (डॉ. शरवनन द्वारा) |
| 08:00 – 08:45 PM | स्वागत और परिचयात्मक सत्र |
| दिन 2 और 3 | नियमित दिनचर्या और साधना |
| 05:00 – 06:15 AM | साधना: आसन, प्राणायाम और मुद्रा (डॉ. कल्याणी) |
| 07:00 – 08:15 AM | यज्ञ, वेद पाठ और प्रवचन (वैदिक विद्वान) |
| 09:00 – 11:15 AM | गर्भाधान विद्या और संस्कारों का महत्व (डॉ. कल्याणी/आचार्या नीरजा) |
| 11:30 – 12:30 PM | गर्भ शोधनम / गर्भ बलम सत्र |
| 03:30 – 04:30 PM | प्राकृतिक चिकित्सा और गर्भावस्था कल्याण |
| 05:30 – 07:00 PM | कैंपस वॉक (पंचतत्व जागरूकता) और ध्यान |
| 08:00 – 08:45 PM | ‘DHYANBABY’ थेरेपी सत्र |
| दिन 4 – रविवार | समापन सत्र |
| 09:00 – 11:00 AM | गर्भाधान विद्या (भाग-3) और आत्मा आवाहनम |
| 11:15 – 01:00 PM | सत्यापन, चिंतन और अगले कदम |
कार्यशाला 1 की विस्तृत समय-सारणी (Workshop 1 Schedule)
| समय | गतिविधि / सत्र |
| दिन 1 (गुरुवार) | आगमन और अभिविन्यास |
| 04:00 – 07:00 PM | नाड़ी परीक्षण (डॉ. शरवनन द्वारा) |
| 08:00 – 08:45 PM | स्वागत और परिचयात्मक सत्र |
| दिन 2 और 3 | नियमित दिनचर्या और साधना |
| 05:00 – 06:15 AM | साधना: आसन, प्राणायाम और मुद्रा (डॉ. कल्याणी) |
| 07:00 – 08:15 AM | यज्ञ, वेद पाठ, वेद अध्ययन और प्रवचन |
| 09:00 – 10:15 AM | संस्कारों का महत्व (आचार्या नीरजा जी) |
| 10:15 – 11:15 AM | गर्भाधान विद्या – भाग 1 और 2 (डॉ. कल्याणी) |
| 11:30 – 12:30 PM | गर्भ शोधनम / गर्भ बलम सत्र |
| 03:30 – 04:30 PM | प्राकृतिक चिकित्सा और गर्भावस्था कल्याण (डॉ. गीतांजलि) |
| 05:30 – 07:00 PM | कैंपस वॉक (पंचतत्व अभ्यास) और ध्यान |
| 08:00 – 08:45 PM | ‘DHYANBABY’ थेरेपी सत्र (डॉ. कल्याणी) |
| दिन 4 (रविवार) | समापन सत्र |
| 09:00 – 11:00 AM | गर्भाधान विद्या (भाग-3) और आत्मा आवाहनम |
| 11:15 – 01:00 PM | सत्यापन, चिंतन और अगले कदम |
कार्यशाला 1 की विस्तृत समय-सारणी (Schedule)
- दिन 1 (गुरुवार): आगमन, नाड़ी परीक्षण (शाम 4-7 बजे) और परिचयात्मक सत्र।
- दिन 2 और 3 (शुक्रवार-शनिवार):
- 05:00 AM: साधना (आसन, प्राणायाम)।
- 07:00 AM: यज्ञ, वेद पाठ और प्रवचन।
- 09:00 AM – 12:30 PM: संस्कार महत्व, गर्भाधान विद्या, और गर्भ शोधनम सत्र।
- शाम: प्राकृतिक चिकित्सा, कैंपस वॉक और ‘DHYANBABY’ थेरेपी।
- दिन 4 (रविवार): आत्मा आवाहनम सत्र, चिंतन और समापन (दोपहर 1:00 बजे तक)।
कार्यशाला 2: सचेत गर्भ पेरेंटिंग के मुख्य बिंदु
यह कार्यक्रम गर्भावस्था के तीनों चरणों (Trimesters) पर केंद्रित है:
- प्रथम चरण: भावनात्मक स्थिरता और गर्भ से संबंध जोड़ना।
- द्वितीय चरण: माँ-बच्चे के बंधन को मजबूत करना और बच्चे के मस्तिष्क विकास में सहायता।
- तृतीय चरण: प्राकृतिक प्रसव के लिए तैयारी और आत्मविश्वास बढ़ाना।
- उद्देश्य: गर्भावस्था को एक पवित्र “साधना” के रूप में अनुभव करना।
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