पण्डित चमूपति जी:

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“रंगीला रसूल” के लेखक

(जन्मजयन्ती पर विशेष)

🚩 महान आर्य विद्वान पं. चमूपति जी 🚩

पंडित चमूपति आर्य समाज के एक अद्वितीय विद्वान, लेखक, कवि और प्रखर वक्ता थे। वे संस्कृत, हिन्दी, अंग्रेज़ी, उर्दू, अरबी और फारसी समेत कई भाषाओं में दक्ष थे। उनके द्वारा लिखी गईं पुस्तकों ने वैदिक संस्कृति और महर्षि दयानंद के विचारों को व्यापक रूप से प्रचारित किया।

वे केवल एक विद्वान ही नहीं, बल्कि एक महान समाज सुधारक और धार्मिक चेतना के वाहक भी थे। उनकी लेखनी में जादू था, और उनके भाषणों में अद्भुत प्रभावशीलता थी। उन्होंने गुरुकुलों में अध्यापन किया और आर्य प्रतिनिधि सभा पंजाब के उपदेशक व प्रचारक के रूप में कार्य किया।

🔥 महर्षि दयानन्द के मिशन को आगे बढ़ाने वाले योद्धा 🔥

आचार्य पण्डित चमूपति महर्षि दयानन्द के विचारों को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख महापुरुषों में से एक थे। उन्होंने ईसाई मत, इस्लाम और आर्य सिद्धांतों का गहन अध्ययन किया था। उन्होंने धर्म और समाज सुधार के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया।


🕉️ जन्म और शिक्षा

📅 जन्म: 15 फरवरी 1893
📍 जन्म स्थान: खैरपुर रामेवाला, बहावलपुर (अब पाकिस्तान)
👨‍👩‍👦 पिता: बसंदाराम मेहता
👩 माता: उत्तमी देवी

पण्डित. चमूपति जी की प्रारंभिक शिक्षा उर्दू और अंग्रेजी में हुई। उन्होंने बहावलपुर के इजर्टन कॉलेज से उर्दू, फारसी और अंग्रेज़ी में स्नातक (B.A.) किया। विशेष बात यह थी कि वे B.A. तक देवनागरी लिपि से अनभिज्ञ थे

🚀 आर्यसमाज से प्रेरित होकर उन्होंने संस्कृत में M.A. करने का संकल्प लिया और इसमें सफलता प्राप्त की, जो एक प्रशंसनीय उपलब्धि थी।


🌿 नास्तिकता से आस्तिकता की ओर

उनका झुकाव पहले सिख मत की ओर था और उन्होंने “जपुजी” का उर्दू में काव्यानुवाद भी किया। लेकिन जब वे पौराणिक विचारधारा से संतुष्ट नहीं हुए तो वे नास्तिक बन गए।

📚 स्वामी विवेकानंद के साहित्य का अध्ययन करने के बाद उनकी जिज्ञासा और बढ़ी, और फिर उन्होंने महर्षि दयानंद के ग्रंथों का गहन अध्ययन किया।

🕉️ इसके बाद वे पुनः आस्तिक बने और आर्य समाज के प्रचार कार्यों में सक्रिय हो गए


📖 प्रमुख ग्रंथ एवं रचनाएँ

🔷 हिन्दी रचनाएँ:
सोम सरोवर
✅ जीवन ज्योति
✅ योगेश्वर कृष्ण
✅ वृक्षों में आत्मा
✅ हमारे स्वामी
✅ रंगीला रसूल

🔷 उर्दू रचनाएँ:
दयानंद आनंद सागर
✅ मरसिया ए गोखले
✅ जवाहिरे जावेद
✅ चौदहवीं का चांद
✅ मजहब का मकसद

🔷 अंग्रेज़ी रचनाएँ:
महात्मा गांधी एंड आर्यसमाज
✅ यजुर्वेद (अनुवाद)
✅ ग्लिम्प्सेज ऑफ दयानंद

📖 सोम सरोवर” उनकी एक उत्कृष्ट कृति है, जिसमें सामवेद के मंत्रों की भावपूर्ण व्याख्या की गई है। इसे पढ़ने पर काव्य का आनंद मिलता है।

📖 “रंगीला रसूल” एक ऐतिहासिक पुस्तक थी, जिसने बहुत विवाद खड़ा किया और इस्लामी जगत में हलचल मचा दी।


🌍 विदेशों में आर्य समाज का प्रचार

🌏 1925 में, आर्य प्रतिनिधि सभा पंजाब के माध्यम से पं. चमूपति जी अफ्रीका गए, जहां उन्होंने वैदिक धर्म और संस्कृति का प्रचार किया।

💬 वहाँ पर एक प्रसंग में, जब पौराणिक विद्वान पं. माधवाचार्य ने उनका अपमान करने की योजना बनाई, तो पं. चमूपति जी ने शालीनता से उत्तर दिया कि “माधवाचार्य की पत्नी को पुत्री मानने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं, बल्कि प्रसन्नता होगी।”

💡 इस जवाब ने सभा में गहरी छाप छोड़ी, और शास्त्रार्थ समाप्त हो गया।


🔥 संघर्ष और बलिदान

📜 “दयानंद आनंद सागर” पुस्तक के कारण पं. चमूपति जी को मुस्लिम रियासत बहावलपुर से निर्वासित कर दिया गया था।

💔 15 जून 1937 को, केवल 44 वर्ष की अल्पायु में, लाहौर में उनका निधन हो गया।

उनका जीवन बलिदान और सेवा का अद्वितीय उदाहरण है।


🎶 प्रेरणादायक गीत

🔸 पं. चमूपति जी के ऋषि दयानंद के बारे में शब्द:

🎵
आज केवल भारत ही नहीं, सारे धार्मिक सामाजिक, राजनैतिक संसार पर दयानन्द का सिक्का है।
मतों के प्रचारकों ने अपने मन्तव्य बदल लिए हैं, धर्म पुस्तकों के अर्थों का संशोधन किया है।
महापुरुषों की जीवनियों में परिवर्तन किया है। स्वामी जी का जीवन इन जीवनियों में बोलता है।

🎵
पापों और पाखण्डों से ऋषि राज छुड़ाया था तूने।
भयभीत निराश्रित जाति को, निर्भीक बनाया था तूने॥
बलिदान तेरा था अद्वितीय हो गई दिशाएं गुंजित थी।
जन जन को देगा प्रकाश वह दीप जलाया था तूने।।


🔥 निष्कर्ष: महर्षि दयानंद के विचारों को अपनाएँ

🚀 आओ! हम अपने आप को ऋषि दयानंद के रंग में रंगें।
💡 हमारा विचार, आचार और प्रचार ऋषि का हो।
🕉️ हमारी प्रत्येक चेष्टा ऋषि की चेष्टा हो।
📢 नाड़ी नाड़ी से ध्वनि उठे – “महर्षि दयानंद की जय!”

🙏 पण्डित. चमूपति जी को उनकी जन्मजयन्ती पर शत-शत नमन! 🙏


यह लेख एक श्रद्धांजलि है उस महान विभूति को, जिनका जीवन आर्य समाज और वैदिक धर्म के प्रचार में समर्पित था। उनकी लेखनी, विचार और कार्य हमें हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे। 🚩