पल पल जीवन जाए रे करले प्रभु का भजन
तर्ज: हाय घबराए रे बिन तेरे मेरा मन
पल पल जीवन जाए रे करले प्रभु का भजन
शरण प्रभु की आजा रे
बारम्बार मिले ना ये मानुष जनम
शरण प्रभु की आजा रे ॥
तज दे क्रोध मद मोह निर्मल कर ले तू मन……मन अनमोल रे
बोल मधुर वचन हर ले सबका तू मन……मधु रस घोल रे
करले सन्तों का संग तज मन मिथ्या कुसंग…….शरण प्रभु की
तेरे अपने करम जाएँ तेरे ही संग……कर्म का मोल रे
तेरे कर्म अधम पाप में जाए न रम…….मन को तोल रे
माटी देखे ये तन देखें प्रभु उजला मन…….शरण प्रभु की
वेदवाणी पूरन, करले वेद पठन……प्रभु का होले रे
इसका हर इक वचन है अनमोल रतन……ऋषि मुनि बोलें रे
पाले प्रभु प्रीतम छूटे जनम मरण…..शरण प्रभु की
……..पल पल जीवन…….
तेरी करनी कथन संग चलें हरदम…सत्य बोल रे
मन का होगा मंथन राह होगी सुगम…प्रभुपथ खोल रे
जब उठेगी तरंग प्रभु से होगा मिलन…शरण प्रभु की…
(मिथ्या) अनुचित प्रकार से, असत्य (अधम) सबसे खराब, निज (सुगम) आसान, सरल (तरंग) लहर










