पहले जानिये-नीर क्षीर छानिये
पहले जानिये-नीर क्षीर छानिये,
खूब पहचानिये-फिर उसे मानिये।
इसे वैदिक सिद्धान्त कहते हैं।। टेक ।।
प्रकृति सत् है जीव सत् चित्त है,
सत् चित् आनन्द प्रभू में तेरा हित है,
ये तीनों सत्तायें नित हैं-युग युगान्त कहते हैं।।1।।
ईश्वरीय नियम और सृष्टि क्रम है
इसके विरूद्ध जो मिथ्या भ्रम है,
अनुकूल ही सत्य धर्म है
पथ निर्भान्त कहते हैं।।2।1
जिसमें लज्जा शंका भय है,
समझों पाप कर्म निश्चय है,
पुण्य से उत्साहित हृदय है।
सुख नितान्त कहते हैं। ।3।।
जन्म मरण संयोग वियोग है,
चक्र निरन्तर कर्म भोग है।
जहाँ भोग है वहाँ रोग है,
निज दृष्टान्त कहते हैं।।4।।
ऋषियों ने यह मार्ग बताया,
प्रेमी जिसने भी अपनाया,
उसने इस जीवन में पाया,
मन को शान्त कहते हैं।।5।।
मनुज मात्र का धर्म एक है,
करो ज्ञान विद्या वर्द्धन एक
ब्रह्म की करो अर्चना,
सम्यक वेद पठनपाठन
अष्ठ प्रमाणों पर परखों हो
जैसा ज्ञान आत्मा में वैसा बोलो-मानो,
करते रहो अध्ययन अध्यापन
विद्या हित ब्रम्हचर्य साधना करो
धर्म में रहो अटल सभी इन्द्रियाँ
अधम आचरण से हों मुक्त बने पावन










