ओ३म् जपने में आनन्द रे मनवा
ओ३म जपने में आनन्द रे
सच्चिदानन्द के इस आनन्द में
बहते ही जाना रे ….ओ३म् जपने
किए जा तू सत्संग कहते सियाने
धीरे-धीरे जागे प्रभु प्रेम जिया में
प्रभु-प्रेम में समाना रे ….ओ३म् जपने
स्वार्थ छोड़ दानशील कर्म किए जा
यज्ञरूप शुद्ध आत्मा से जिए जा
वेद पथ पे ही जाना रे ….ओ३म् जपने
देव जो बने है सदा चलते नियम से
तू भी चल मेरे मन धैर्य संयम से
शुभ संकेत पाना रे…. ओ३म् जपने
अग्निरूप ईश्वर का ध्यान तू किए जा
प्रभु का प्रकाश प्रभु से ही लिए जा
संग प्रभु का सुहाना रे….ओ३म् जपने
प्रभु भक्ति के लिए कर ना बहाने
मत गँवा हाथ आए पल ये सुहाने
पीछे नहीं पछताना रे….ओ३म् जपने
तर्ज: मेरे सपने में आना रे










