ओ३म् है अमृत का इक सागर
ओ३म् है अमृत का इक सागर
इस सागर से भर लो गागर
जिस – जिस ने अमृत ये पिया है
उस ने नजारा अजब लिया है
दु:ख उससे भागे घबरा कर
ओ३म् है अमृत का इक सागर
आस न छोड़ो हरी मिलेंगे (1)
धर्मों की राह पे चल के मिलेंगे
उस कृपा जहाँ मिलें वहाँ पर
ओ३म् है अमृत का इक सागर










