ओं भूः ओं भुवः
ओं भूः ओं भुवः
गीत मैं गाऊँ तेरा।
सच्चिदानन्द प्रभु
ध्यान लगाऊँ तेरा ॥
पाप की वृत्ति सदा,
दूर हटाती तुमसे।
किस तरह देव बता,
दर्श मैं पाऊँ तेरा ॥ १ ॥
प्राकृतिक भोग की तृष्णा
में मन कभी न फँसे ।
ऐसी भक्ति का विभु
रंग चढ़ाऊँ तेरा ॥ २ ॥
मेरा मन मस्त रहे,
भोग सताएँ न मुझे।
ऐसा अधिकार मिले,
पुत्र कहाऊँ तेरा ॥ ३ ॥
वेद माता के प्रति,
नाथ मुझमें श्रद्धा रहे।
दिव्य सन्देश सदा,
सबको सुनाऊँ तेरा ॥ ४ ॥
पाप अज्ञान का परदा,
हटा दो हे भगवन् ।
“आत्मानन्द” प्रभू,
दीप जलाऊँ तेरा ॥ ५ ॥










