ईश्वर प्रार्थना
“ओ३म् असतो मा सद्गमय,
तमसो मा ज्योतिर्गमय,
मृत्योर्मा अमृतं गमय ।।” – उपनिषद्
तर्ज-आवो तो जावो म्हारा लाडकड़ा जमाई ओ….
सुणज्यो सायब म्हारी, अरजी नै सुणज्यो ।
हाँ अरजी नै सुणज्यो
मरजी पूरी थाँ ही कर ज्यो जी । । टेक ।।
झूठला गैला सूंदूरो, राखो म्हारा सायबा ।
हाँ राखो म्हारा सायबा ।
सांचोड़ा मारग घर ज्यो जी ।।१।।सुणज्यो….
अज्ञान रूपी अन्धेरा नें, मेटो म्हारा दाता,
हाँ मेटो म्हारा दाता ।
ज्ञान रो दीवो थाँ कर ज्यो जी ।।२।।सुणज्यो….
मौत सूं म्हाँनें अळगा, राखो म्हारा स्वामी,
हाँ राखो म्हारा स्वामी
अमर होवा री किरपा कर ज्यो जी ।।३।। सुणज्यो….
“धरम” ने “धर” लूं मूं, आर्य भी वऽऽणुं ।
हाँ आर्य भी वऽऽऽणुं ।
बणं मूं पकारी एसो कर ज्यो जी ।।४।। सुणज्यो…
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