“निर्मद कोई आ जाता है, जो भी प्रभु-शरण| उसके संकट हरते प्रभु, करते अतिप्रसन्न”

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ओ३म् इ॒ह त्वा॒ भूर्या च॑रे॒दुप॒ त्मन्दोषा॑वस्तर्दीदि॒वांस॒मनु॒ द्यून्।
क्रीळ॑न्तस्त्वा सु॒मन॑सः सपेमा॒भि द्यु॒म्ना त॑स्थि॒वांसो॒ जना॑नाम् ॥९॥
ऋग्वेद 4/4/9

निर्मद कोई आ जाता है
जो भी प्रभु-शरण
उसके संकट हरते प्रभु
करते अतिप्रसन्न
आता जो उसके दर पर
रक्षा करता वो सत्वर
करता है प्रभु से विनती
मन रखता श्रद्धा पर
पाता है प्रभु से वो ही
प्यार नित नए
प्यार ऐसा जिस पे भक्त
वारी-वारी हो गए
होऽऽऽऽऽऽऽ
निर्मद कोई आ जाता है
जो भी प्रभु-शरण

करते हैं दाता मङ्गल
देते प्रभु अन्न-जल
और देते ऐश्वर्य कीर्ति
यश धन व बल
होता जीवन उज्जवल
दूर करते अनभल
जीवन-पथ सुगम बनाते
दूर करते अर्गल
इसलिए यज्ञभाव से
खुद को करो अर्पण
श्रद्धा-भक्ति से गाओ
ईश का गायन
पाता है प्रभु से वो ही
प्यार नित नये
प्यार ऐसा जिस पर भक्त
वारि-वारि हो गए हो
निर्मद कोई आ जाता है
जो भी प्रभु-शरण
उसके संकट हरते प्रभु
करते अतिप्रसन्न
आता जो उसके दर पर
रक्षा करता वो सत्वर
करता है प्रभु से विनती
मन रखता श्रद्धा पर
पाता है प्रभु से वो ही
प्यार नित नए
प्यार ऐसा जिस पे भक्त
वारी-वारी हो गए
होऽऽऽऽऽऽऽ
निर्मद कोई आ जाता है
जो भी प्रभु-शरण

ऐ चमकने वाले !!
प्रभावान् भगवन् !!
कर लें तेरी सेवा,
प्रेम और आराधन
करके नियम-पालन
करें मन का क्षालन
सुख के मूल स्रोत का
ज्ञान दो प्रभावन
लगते हैं बन्धु-बांधव
सुख के साथी
अपने लगने वाले
बन जाते हैं स्वार्थी
पाता है प्रभु से प्यार
वो ही नित्य नए
प्यार ऐसा जिस पे भक्त
वारि वारि गए
हो ऽऽऽऽऽऽऽ
निर्मद कोई आ जाता है
जो भी प्रभु-शरण
उसके संकट हरते प्रभु
करते अतिप्रसन्न
आता जो उसके दर पर
रक्षा करता वो सत्वर
करता है प्रभु से विनती
मन रखता श्रद्धा पर
पाता है प्रभु से वो ही
प्यार नित नए
प्यार ऐसा जिस पे भक्त
वारी-वारी हो गए
होऽऽऽऽऽऽऽ