निर्जिव है ये जीवन प्रभु प्रेम बिना
पीते रहे ओ३म् रस, प्याला भरे हुए ॥ निर्जिव है..
जो लगे जग के मेले, गया मन वहाँ ठहर
साँसे तो छूटी तृष्णा छोड़ी नहीं मगर
हर बार जन्म मृत्यु के काँटे गड़े हुए ॥ निर्जिव है..
ये जीवन नाव डोले मॅझघार में सफर
जो दुरित हैं राह रोकें लागे कठिन डगर
गर तू है माँझी, समझो हम हैं तरे हुए | निर्जिव है..
चाहकर ना कोई अपना, ना कोई है हमसफर
इक तू ही तू सहारा, जिसपर सभी नज़र
श्रद्धा व प्रेम तुझको, अर्पण किए हुए ॥ निर्जिव है..
मन चित्त में तू समाए आत्मा हो तेरा घर
तेरा वेद ज्ञान लेकर हो जाएँ हम अमर
अन्धकार में जो जीते मानो मरे हुए ॥ निर्जिव है…
(दुरित) पातक, पाप, पापी (डगर) रास्ता, पथ (हमसफर) साथ चलनेवाला
तर्ज: दिल ढूँढ़ता है फिर वही










