नवसृष्टि संवत् एवं नवसस्येष्टि (होली) महोत्सव 2025
धार्मिक उत्सव एवं भारतीय परंपराओं का संगम
भूमिका
भारत एक सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं से समृद्ध देश है, जहाँ प्रत्येक उत्सव केवल एक पर्व नहीं, बल्कि समाज में भाईचारे, आध्यात्मिकता और संस्कृति के प्रचार-प्रसार का माध्यम होता है। ऐसा ही एक विशिष्ट पर्व “नवसृष्टि संवत्” और “नवसस्येष्टि (होली) महोत्सव” है, जो ऋषि परंपरा एवं वैदिक संस्कृति से प्रेरित है।
महोत्सव का आयोजन
इस पावन अवसर पर महर्षि दयानंद सरस्वती एवं आचार्य बलदेव जी महाराज की स्मृति में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन ग्राम भड़ताना, जिला जींद (हरियाणा) में किया जा रहा है।
कार्यक्रम का विवरण
गुरुवार, 13 मार्च 2025
- पारिवारिक यज्ञ: सुबह 7:00 बजे से 11:00 बजे तक।
- सामूहिक यज्ञ एवं भजन संध्या: दोपहर 12:00 बजे से 4:00 बजे तक।
- रात्रि भजनोपदेश: रात 8:00 बजे से 11:00 बजे तक।
- मुख्य अतिथि: श्रीमती सरोज देवी (जिला समाज कल्याण अधिकारी)।
शुक्रवार, 14 मार्च 2025
- पारिवारिक यज्ञ: सुबह 7:00 बजे से 11:00 बजे तक।
- चौराहों पर यज्ञ: दोपहर 11:00 बजे से 12:00 बजे तक।
- शोभायात्रा एवं सामूहिक कार्यक्रम: दोपहर 12:00 बजे से 4:00 बजे तक।
- मुख्य अतिथि: माननीय मो. इमरान रज़ा (उपायुक्त, जिला जींद)।
महत्व एवं धार्मिक दृष्टिकोण
नवसृष्टि संवत् (नववर्ष) का महत्व
“नवसृष्टि संवत्” भारतीय नववर्ष का प्रतीक है, जिसे चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। यह दिन केवल नए वर्ष का आरंभ ही नहीं, बल्कि एक नए संकल्प, नई ऊर्जा और नवचेतना का भी प्रतीक है।
नवसस्येष्टि (होली) का महत्व
होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि वैदिक संस्कृति में इसे “नवसस्येष्टि” के रूप में मनाने की परंपरा रही है, जिसमें नई फसल की उपज का भगवान को अर्पण कर आभार प्रकट किया जाता है। यह कृषि प्रधान भारत में अन्नदाता कृषकों के सम्मान का पर्व भी है।

विशेष आकर्षण एवं आयोजक मंडल
इस महोत्सव को सफल बनाने के लिए “आत्मानंद श्रुतिधाम” एवं ग्राम पंचायत, भड़ताना (जींद) मिलकर आयोजन कर रहे हैं। संपर्क सूत्र पर आयोजकों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
संपर्क सूत्र:
📞 9416773617 | 9466013563 | 9416975895
निष्कर्ष
यह महोत्सव भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने वाला है। इसमें यज्ञ, भजन, शोभायात्रा एवं समाजोत्थान से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से अध्यात्मिक जागरूकता फैलाई जाएगी। यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना का एक प्रयास भी है।
आइए, हम सब मिलकर इस पावन अवसर पर अपनी संस्कृति को संरक्षित और संवर्धित करने का संकल्प लें!
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