ननकाना की ओर बढ़ो यदि खालिस्तान न मांगो

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ननकाना की ओर बढ़ो यदि खालिस्तान न मांगो

ननकाना की ओर बढ़ो
यदि खालिस्तान न मांगो
सारा पौरूष ने ललकारा
भारतवर्ष तुम्हारा है।
किसने तुमको बहकाया है
क्यों अपने घर को भूले।

अपने हाथों काट रहे हो
अपने ही सर को भूले
गुरूओं की वाणी क्यों भूले
क्यों परमेश्वर को भूले
मतिदास गुरू तेगबहादुर
फतेह जोरावर को भूले
लुटे पिटे कट गया वतन
क्या नहीं वह याद नजारा है।।।

रावी के उस पार दिखाओ
मरदानो मरदानी को आओ
हम सब चलें मिलकर
लेने ज्यादाद पुरानी को।

महाराजा रणजीत सिंह की
उस सुन्दर राजधानी को ले
आओ लाहौर को वापिस कर दो
सफल जवानी को।।
आज कैद से लन्दन की
कोहनूर ने तुम्हें पुकारा है।।2।

मजहब वह विदेशी है
जो देश को खण्डित कर बैठे।
जान माल असमत लूटी
निर्दोष को दण्डित कर बैठे ।।

नादानी से मुल्ला मौलवी
पादरी पंडित कर बैठे ।।
आज आप भी उसी बुरे मार्ग को
मंडित कर बैठे।।
गुरुओं का यह श्रेष्ठ पन्थ
भारत की जीवन धारा है।।3।।

जो भूले हो चुकी उन्हें
दोबारा नहीं होने देगें।
जर सर हर नारी नर डर कर
घर घर नही रोने देगें।।

जिसके कण कण में विष है
वह बीज नहीं बोने देगें।।
छेड़ छाड़ जो करे उसे
हम चैन से नहीं सोने देगें।
षठे षाठयम् समाचरेत
प्रेमी सिद्धान्त हमारा है।।4।।

अश्क आखिर अश्क है
शबनम नहीं है,
दर्द आखिर दर्द है सरगम नहीं है,
उमर के न्यौहार में है रोना मना,
जिन्दगी है जिन्दगी मातम नही है।।