नादिर और चंगेज की

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नादिर और चंगेज की

नादिर और चंगेज की,
बदकारी अंग्रेज की,
इस आज के दहेज की
प्रथा ने सारी भुला दई।
अच्छा खान दान हो,
और छोरी गुण की खान हो,
पर दहेज कम सामान हो
तो रिश्तेदारी भुला दई ।।1।।

सास ननद मारे बोली,
पीटें भर-भर कर कोली,
गरीब की छोरी भोली-भाली,
सूरत प्यारी भुला दई।।2।।

डूबके पानी में गलगी,
अनगिन अग्नि में जलगी,
उल्टी हवा ऐसी चलगी,
सब चाल हमारी भुला दई ।।3।।

जब धन तुमको ईश्वर देगा,
सन्तोष करो घर भर देगा,
आशाओं की भर देगा झोली
न्यायकारी भुला दई ।।4।।

ओरों की क्यों आस करो,
कुछ अपने पर विश्वास करो,
शुभ कर्म करो और साहस करो,
क्यों जिम्मेदारी भुला दई ।।5।।

वर कन्या के कर्म मिला,
स्वभाव मिला गुण धर्म मिला,
प्रेमी स्वास्थ्य और शर्म मिला
क्यों सब होशियारी भुला दी गई।।6।।