ना है कोई खिवैया,मझधार में है नैंया।
तर्ज – दिल में तुझे बिठाके……..
ना है कोई खिवैया,
मझधार में है नैंया।
आकर प्रभु बचालो,
कश्ती मेरी संभालो।
- जीवन रूपी इस नैया को,
कैसे पार लगाऊँ
गहरा पानी दूर है जाना,
कैसे मंज़िल पाऊँ तू
ही प्रभु बचैया, मझधार……
2. तेरे बिन है कौन मेरा इक,
तू ही मेरा सहारा बीच
भंवर में डोल रही है,
काफी दूर किनारा
संसार के रचैया, मझधार……
3. चाहुँ होना पार हे भगवन,
पर हूँ मैं मजबूर तूफाँ
आया आज भयंकर,
और है मंज़िल दूर साहिल
के ओ दिखैया, मझधार…
4. दे दो भगवन साथ अब तो,
गहरे मझधारों में आज
“सचिन” ने जाना तुमको,
माना गमख़्वारों में जरों
में तू रमैया, मझधार……










