मोक्ष की बातें छोड़ों पहले धरती पर रहना सीखो।
मोक्ष की बातें छोड़ों पहले
धरती पर रहना सीखो।
क्या करना क्या नहीं करना है
सुनना क्या कहना सीखो ।।
यदि नहीं सुधरा है प्यारे
यह लौकिक व्यवहार तेरा।
मोक्ष तो क्या यह मानव चोला
पाना भी दुश्वार तेरा।
मननशीलता नहीं हैं
तो पढ़ना लिखना बेकार तेरा।
स्वयं आचरण नहीं हैं
तो दो कोड़ी का प्रचार तेरा
कहना कुछ और करना
कुछ इस बहाव में मत बहना सीखो । ।1।।
जिस तरह कठोर वृक्ष भी
फल पाकर नीचे झुक जाता है।
इसी प्रकार विद्या पाकर
विद्वान सरस हो जाता हैं।।
पेट का पैमाना जिह्या यह सारा
जगत बताता है।
थोड़ी देर बात करने से
सभी भेद खुल जाता है।।
सामने स्तुति बाद में निन्दा बुरी है
लत यह ना सीखो।।2।।
आचार हीनम् न पुनन्ति वेदाः
हमें ऋषि बतलाते हैं।।
फिर क्यों केवल साक्षरता का
रौब जमाना चाहते हैं।
श्रवण मनन निदिध्यासन का
जो नियम नहीं अपनाते हैं।
गधे की भांति बोझ व पढ़ने
लिखने का ढो जाते हैं।।
मन और वचन कर्म से भी
तुम किसी को मत दहना सीखो।।3।
अपने लिये जो औरों से
व्यवहार कराना चाहते हो।।
वही व्यवहार औरों के लिये
क्यों नहीं अपनाना चाहते हो।
सर्वश्रेष्ठ मानव चोला मिट्टी में
मिलाना चाहते हो।
औरों को क्या धोखा दो
खुद धोखा खाना चाहते हो।।
शोभाराम जिससे हो कंलकित
जीवन तुम वहना सीखो ।।4।।
ज्ञान ज्योति की कामना
हे ईश हमारे अन्तर में,
कर कृपा प्रकाशिव हो जाओ
अज्ञान तिमिर निद्रा हर कर,
तुम ज्ञान भानु को चमकाओं
यह जीवन मनुज देह धारी है
धमार्थ काम पथचारी है
यह मोक्ष मार्ग पर चल जावे,
निज भक्ति अकुंर उपजाओ
हमे सन्मार्ग के राही कर
उत्तम गुण ज्ञान के गृाही कर
जिसमे हमको सदज्ञान मिले
वह युक्ति हमें प्रभु समझओ ।।










