ओ3म्
श्रावणी पर्व पर विशेष……..
….अग्निव्रत अभी जीवित है
(वेद व आर्ष ग्रन्थों पर आक्षेप करने वालों को खुला निमन्त्रण)
घोषणा
वेद परमात्मा, जो सम्पूर्ण सृष्टि का रचयिता व संचालक है, का ज्ञान है। इसमें किसी प्रकार की कोई हिंसा, अश्लीलता, नर- पशु बलि, मांसाहार, अवैज्ञानिकता, स्त्री व शूद्र के शोषण जैसा कोई पाप नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण वेद सर्वहितकारी ज्ञान-विज्ञान का ब्रह्माण्डीय ग्रन्थ है।
वे ग्रन्थ जिन पर आक्षेप आमन्त्रित हैं-
- वेद
- निरुक्त
- दर्शन
- मनुस्मृति
- आरण्यक
- ब्राह्मण ग्रन्थ
- ईश आदि चौदह उपनिषद्
- महाभारत
- वाल्मीकीय रामायण
- ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका
- सत्यार्थप्रकाश

ज्ञातव्य
१. किसी भी सम्प्रदाय वा नास्तिक (स्वयं में एक सम्प्रदाय) व्यक्ति उपर्युक्त ग्रन्थों पर अपने आक्षेप (शंकाएँनहीं) सत्य सिद्ध करते हुए हमें भेज सकते हैं।
२. चार मास के पश्चात् सभी आक्षेपों को सार्वजनिक किया जाएगा और संसार के सभी वैदिक विद्वानों को इनका उत्तर देने के लिए आमन्त्रित किया जाएगा। यदि वे महर्षि दयानन्द की 200वीं जयन्ती (फाल्गुन कृष्णा १० / २०८०, 5 मार्च 2024 ) से पूर्व समुचित उत्तर देते हैं, तो उनके उत्तर को ग्रन्थ में उनके नाम से प्रकाशित किया जाएगा, यदि वे उत्तर देने में असमर्थ होते हैं, तो मैं उनके उत्तर दूँगा।
३. इसके पश्चात् यदि कोई आरोप लगाता है, तो उसका कोई उत्तर नहीं दिया जाएगा।
४. वेद के जिन मन्त्रों पर आक्षेप लगेगा, मैं उनके एक नहीं, बल्कि तीन-तीन प्रकार के अर्थ प्रकाशित करूँगा।
५.मैं केवल आक्षेपों के उत्तर हो नहीं दूंगा, अपितु उनमें छिपे विज्ञान के गूढ़ रहस्यों को भी उद्घाटित करूँगा।
आक्षेप भेजने की अन्तिम तिथि–
पौष कृष्णा ४ / २०८० (31 दिसम्बर 2023)
आक्षेप भेजने हेतु यहाँ क्लिक करें:- https://bit.ly/agnivrat
आक्षेपों के उत्तर में ग्रन्थ का लेखन प्रारम्भ-
महर्षि दयानन्द की 200वीं जयंती (फाल्गुन कृष्ण 10 / 2080, 5 मार्च 2024) से
इसका परिणाम…..
१. इस ग्रन्थ के प्रकाशित होने के पश्चात् कोई भी वेदविरोधी सनातनधर्मियों को भ्रमित करके धर्मान्तरित नहीं कर सकेगा। वेद के अध्यापक एवं अध्येताओं में एक नया अपूर्व विश्वास उदित हो सकेगा।
२. संसार का कोई भी वेदविरोधी बुद्धिजीवी वेद एवं आर्ष ग्रन्थों पर आक्षेप नहीं कर सकेगा।
३. संसार को वेद का यथार्थ एवं वैज्ञानिक स्वरूप विदित हो सकेगा, जिससे सच्ची मानवता की विजय होगी।
४. देश की युवा पीढ़ी में राष्ट्र के प्राचीन गौरव के प्रति श्रद्धा का उदय होकर राष्ट्रीय स्वाभिमान जग सकेगा।
५. अन्य सम्प्रदायों एवं नास्तिक मत के युवा-युवती भी वैदिक सनातन धर्म की ओर आकृष्ट होने के साथ-२ सच्चे राष्ट्रभक्त बन सकेंगे।
मैं वैदिक विज्ञान के द्वारा एक अखण्ड, सुखी व समृद्ध भारत के निर्माण की आधारशिला रखने का प्रयास कर रहा हूँ, जिसमें प्रत्येक भारतीय तन, मन, विचारों व संस्कारों से विशुद्ध भारतीय होगा। उसके पास अपना विज्ञान वेदों, ऋषियों व देवों के प्राचीन विज्ञान पर आधारित एवं अपनी भाषा हिन्दी व संस्कृत में होगा। उसे अपने पूर्वजों की प्रतिभा, चरित्र एवं संस्कारों पर गर्व होगा, उसे पाश्चात्य विद्वानों की बौद्धिक दासता से मुक्ति मिलेगी, जिससे दुष्ट मैकाले का वर्तमान में साकार हो चुका स्वप्न ध्वस्त हो सकेगा। यह प्यारा राष्ट्र पुनः विश्वगुरु बनकर विश्व को शान्ति एवं आनन्द का मार्ग दिखाएगा।- आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक

*वेद व आर्ष ग्रन्थों पर आक्षेप करने वालों को खुला निमन्त्रण*
सभी देशभक्त एवं वैदिक सनातन धर्मप्रेमी बंधुओ, माताओं एवं बहनो! आपसे निवेदन है, आग्रह है कि वे इस ऐतिहासिक वीडियो को सम्पूर्ण विश्व में अधिकाधिक प्रसारित करने में अपना पूर्ण पुरुषार्थ करें तथा अपने इष्ट मित्रों व सम्बन्धियों को भी ऐसा ही करने का निवेदन व आग्रह करें। ध्यान रहे, देश व वैदिक सनातन धर्म को बचाने का इससे अच्छा और कोई अवसर फिर नहीं मिलेगा।
वीडियो लिंक : https://youtu.be/eMxIESlMMXo
*घोषणा डाउनलोड करें :*
हिन्दी : https://bit.ly/announcement_hi
English : https://bit.ly/announcement_en
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