मत रो माँ तेरा लाल वो हो गया शहीद।

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मत रो माँ तेरा लाल वो हो गया शहीद।

मत रो माँ तेरा लाल वो हो गया शहीद।
कर हिन्द का ऊँचा भाल वो हो गया शहीद॥
आँसू ये रोक अपनी आँखों से ढलते माँ।
सिंहनी के बेटे जंग की खातिर ही पलते माँ ॥
दुश्मन का बनके काल वो हो गया शहीद॥1॥
मत रो माँ….

इतना तो माना एक था लख्ते जिगर तेरा।
उस एक से ही जग में ऊँचा है सर तेरा॥
करके तुझे निहाल वो हो गया शहीद॥2॥
मत रो माँ….

उस वीर सुत की माँ है, धन्य माँ तुझे।
तेरे सुत से राष्ट्र गर्वित और चाहिये क्या तुझे ॥
संकट वतन का टाल वो हो गया शहीद॥3॥
मत रो माँ….

कर्मठ तिरंगा ध्वज ये बलिदान पर टिका।
बलिदानियों से रोशन दीपक है सर जमीं का॥
ध्वज राष्ट्र को सम्भाल वो हो गया शहीद॥4॥
मत रो माँ….

एक सैनिक को अपनी बहन की
मृत्यु का पत्र मोर्चे पर मिलता है
जिसको दहेज के कारण ससुराल
वालों ने जला दिया था-