मरने को तैयार हम,अपने वतन के वास्ते।

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मरने को तैयार हम, अपने वतन के वास्ते।

मरने को तैयार हम,
अपने वतन के वास्ते।
देंगे सब कुछ वार हम,
अपने वतन के वास्ते॥टेक॥

समझेगा कमजोर जो
हमको ये उसकी भूल है।
प्यार करते हैं सभी से
अमन के हम फूल है॥
बन जायेंगे अंगार हम,
अपने वतन के वास्ते ॥1॥

हर एक ही हम हैं शिवा
हर एक हम प्रताप हैं।
है नजर उन पर हमारी
जो आस्तीन के सांप हैं।
उन विषधरों को दें मार हम,
अपने वतन के वास्ते ॥2॥

नारा जो देते हैं तराजू
और तिलक तलवार का।
लगता है उनके हाथों में
किसी हाथ है गद्दार का॥
गद्दारों को करें बहार हम,
अपने वतन के वास्ते॥3॥

धूल चन्दन सी है जिसकी
भूमि ये श्रीराम की।
दे रही उपदेश अब तक
सीता यहां घनश्याम की॥
मरके जन्मेंगे हर बार हम,
अपने वतन के वास्ते॥4॥

जो कभी भी राह में
आकर हमें टकरायेगा।
कोई भी हो जिन्दा ना
बचकर यहां से जायेगा॥
उसके लिए तलवार हम,
अपने वतन के वास्ते ॥5॥

दोस्त के लिए दोस्त
दुश्मन के लिए शोले हैं हम।
मातृभूमि की रक्षा के लिए
हाथों में ले गन वो बम।
देते हैं ललकार हम,
अपने वतन के वास्ते॥6॥

किसीने भारत माँ को
डायन अगर फिर कह
दिया सौगन्ध हल्दीघाटी
की जो सर को तेरे ना लिया॥
करते हैं खबरदार हम,
अपने वतन के वास्ते॥7॥

राष्ट्र का ये गीत है
गायेंगे वन्दे मातरम्।
स्वतन्त्रता की जीत है
गायेंगे वन्दे मातरम्॥
कर्मठ क्यों मानें हार हम
अपने वतन के वास्ते॥8॥