मर जावेगा मूरख क्यों न भजे भगवान्

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मर जावेगा मूरख क्यों न भजे भगवान्

मर जावेगा मूरख
क्यों न भजे भगवान्
झूठी माया जगत् की
मत करना अभिमान

मत करना अभिमान
वेद शास्त्र यूँ कहवे
तज ममता, भज ओम्
नाम थारो अमर रहवे

कहे दीन दरवेश
फिर अवसर कब आवे
क्यों न भजे भगवान्
अरे मूरख मर जावे

काल झपट्टा दे रहा
दिन में बार हजार
मूरख नर चेते नहीं
फिर कैसे उतरे पार

कैसे उतरे पार
मोह में हार्यो बाजी
जान्यो नहीं जगदीश
इस माया में रह्यो राजी

कहे दीन दरवेश
छोड़ दे कूड कपट्टा
दिन में बार हजार
ओ काल !
आपा ने दे रह्यो झपट्टा

रहना है होशियार
नगर में एक दिन चोरवा आवेगा

रहना है होशियार
नगर में एक दिन चोरवा आवेगा

तोप तीर तलवार ना बरछी
ना वह बन्दूक चलाएगा,
आवत जावत लखे नहीं कोई
इस घर में धूम मचाएगा
इसलिए
होशियार !!!
जागते रहो !!
जागते रहो !!

रहना है होशियार
नगर में एक दिन चोरवा आवेगा

आकर तुझे ले जाएगा
एक दिन चोरवा आएगा

रहना है होशियार
नगर में एक दिन चोरवा आवेगा

ना घर फोड़े, ना घर तोड़े
ना वह रूप दिखाएगा
नगरी से कछु काम नहीं है
भाई ! तुझे पकड़ ले जाएगा
इसलिए
होशियार !!!
जागते रहो !!
जागते रहो !!

रहना है होशियार
नगर में एक दिन चोरवा आवेगा

नहीं फरियाद – सुनेगा तेरी
ना कोई तुझे बचाएगा
लोग, कुटुम्ब, परिवार घणेरे
एक भी काम न आएगा

रहना है होशियार
नगर में एक दिन चोरवा आवेगा

सुख-सम्पत्ति धन-मान बढ़ाई
त्याग सकल तू जाएगा
ढूढ़ें पता लगे नहीं तेरा
भाई !!
खोजी खोज नहीं पाएगा
इसलिए
होशियार !!!
जागते रहो !!
जागते रहो !!

रहना है होशियार
नगर में एक दिन चोरवा आवेगा
आकर तुझे ले जाएगा

है कोई ऐसा सन्त विवेकी
हरी गुण आय सुनाएगा
कहत “कबीर” सुनो भाई साधो
फिर खोल किवाड़ी तू जाएगा
रहना है होशियार
नगर में एक दिन चोरवा आवेगा

रहना है होशियार
नगर में एक दिन चोरवा आवेगा