मन तो चंचल है इसे वश में जरा लाने दो

0
26

मन तो चंचल है इसे वश में जरा लाने दो

तर्ज : जल के दिल खाक हुआ आँख से रोया न गया

मन तो चंचल है इसे वश में जरा लाने दो

ईश चरणों में इसे शरण मिले आने दो ॥ मन तो ॥

आए दुःख रोता है मन आँख में आँसू भरभर

धर के धीरज इसे दुःख दर्द को मिटाने दो ॥ मन तो ॥

ये चकाचौंध ज़माना तो बस छलावा है

लोभ में इसके कभी मन को न तुम आने दो ॥ मन तो ॥

मन भटक जाए तो बस मूँद लो आँखें पलभर

मन को खुद अपने ही मन्दिर में जरा जाने दो ॥ मन तो ॥

प्रभु के ध्यान में खो जाने दे तू निज मन को

मोक्ष सागर से मन की नैया को तर जाने दो ॥ मन तो ॥

तू ‘ललित’ मन की डोर दे दे प्रभु के हाथों में

मन को सत्कर्म की सही राह गुज़र जाने दो ॥ मन तो ॥