मन के संशय छोड़ के सारे, आया तेरे द्वार ईश्वर

0
54

भक्ति

मन के संशय छोड़ के सारे
आया तेरे द्वार ईश्वर, आया तेरे द्वार।।

यह धन अब तेरा ही धन है,
वन्दन ही मेरा जीवन है।
अर्पण है तेरे चरणों में,
मेरा सब संसार।।
आया तेरे द्वार ईश्वर, आया तेरे द्वार। ।1।।

कैसी अद्भुत तेरी माया,
देने वालों ने ही पाया।
मेरी झोली एक है दाता,
तेरे हाथ हजार।।
आया तेरे द्वार ईश्वर, आया तेरे द्वार। ।2।।

और सभी मतलब के पुतले,
करें, अहित सब हित के बदले।
तू ही केवल सच्चा दानी,
दाता विपुल उदार।
आया तेरे द्वार ईश्वर, आया तेरे द्वार।।3।।

सुविचार

मृत्योर्माऽमृतं गमय।
हे देव ! मुझे मृत्यु से अमृत की ओर ले चल।