मन हमेशा पतन की ओर जाता है

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मन हमेशा पतन की ओर जाता है

मन हमेशा पतन की ओर जाता है
जल हमेशा ढाल की ओर बहता है
जल और मन का स्वभाव एक ही है
जल यन्त्र से ऊपर उठता है
और मन, मन्त्र से ऊपर उठता है

आदत बुरी सुधार लो
बस हो गया भजन भजन
मन की तरंग मार लो
बस हो गया भजन भजन

दृष्टि में तेरे दोष है
दुनिया निहारती
समता का अञ्जन आँज लो
बस हो गया भजन भजन

आए कहाँ से और अब
जाना कहाँ हमें सोचो
मन में यही विचार लो
बस हो गया भजन भजन

नेकी सभी के साथ में
जितनी बने करो भाई
मत सिर बदी का भार लो
बस हो गया भजन भजन

कटुता मनो से त्याग दिया
मीठे वचन कहो भाई (1)
वाणी का स्वर सुधार लो
बस हो गया भजन भजन

अच्छे बुरे जो भी हमें
कर्मों के फल दिये प्रभु ने
हँस कर सभी गुजार दो
बस हो गया भजन भजन

आदत बुरी सुधार लो
बस हो गया भजन भजन
मन की तरंग मार लो
बस हो गया भजन भजन