महर्षि दयानन्द सरस्वती समग्र क्रांति के अग्रदूत – स्वामी आर्यवेश
गाजियाबाद | 15 फरवरी 2025
गाजियाबाद, रविवार, 15 फरवरी 2025। आर्य केंद्रीय सभा द्वारा आयोजित महाशिवरात्रि ऋषि बोधोत्सव आर्य समाज राजनगर में अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आर्य प्रतिनिधियों, धर्मप्रेमियों और स्थानीय श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के दौरान आर्य जगत के प्रसिद्ध भजन सम्राट कुलदीप विद्यार्थी एवं उनके साथी कलाकारों ने ऋषि दयानन्द को समर्पित प्रेरक भजनों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। पूरा सभागार वैदिक भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण से गुंजायमान हो उठा।

महर्षि दयानन्द समग्र क्रांति के अग्रदूत :
समारोह के मुख्य अतिथि स्वामी आर्यवेश (प्रधान, सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा) ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज ऋषि बोधोत्सव केवल भारत ही नहीं, बल्कि ऋषि जन्मभूमि टंकारा सहित देश-देशांतरों में श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानन्द समग्र क्रांति के अग्रदूत थे और उनके कार्यों की छाप समाज के हर क्षेत्र में स्पष्ट दिखाई देती है।
उन्होंने नारी उत्थान, शिक्षा के प्रसार, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन और तर्कशील चिंतन के विकास में महर्षि के अद्वितीय योगदान को रेखांकित किया। उनके अनुसार, महर्षि दयानन्द ने समाज की सोच को नई दिशा दी और व्यक्ति में विवेक और तर्क शक्ति का विकास किया।
ऋषि के आदर्शों पर चलने का संकल्प :
समारोह के मुख्य वक्ता स्वामी आदित्यवेश ने कहा कि महर्षि दयानन्द द्वारा वेद ज्ञान सहित विविध विद्याओं की प्राप्ति शिवरात्रि के दिन हुए उस दिव्य बोध का परिणाम थी। उन्होंने कहा कि ऋषि बोधोत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और संकल्प का दिवस है।
उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से आह्वान किया कि वे ऋषि के जीवन चरित्र का अध्ययन कर अपने जीवन को वेद ज्ञान से सुशोभित एवं सुरभित करने का संकल्प लें।


महर्षि के आदर्श आज भी प्रासंगिक :
आचार्य कृष्ण मुनि ने कहा कि महर्षि दयानन्द के आदर्श आज भी पूर्णतः प्रासंगिक हैं। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों, पाखंड और अंधविश्वास पर निर्भीक प्रहार किया, जिसके लिए असाधारण साहस की आवश्यकता होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में महर्षि की विचारधारा से प्रेरित होकर हजारों युवाओं ने स्वतंत्रता के लिए संघर्ष का मार्ग अपनाया।
विशिष्ट अतिथि पूनम चौधरी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वेदों की पुनर्स्थापना तथा महिला सशक्तिकरण में ऋषि का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।
वेद ज्ञान का महत्व :
समारोह अध्यक्ष श्रद्धानन्द ने कहा कि वेद ज्ञान से रहित मनुष्य पशु समान हो जाता है। सत्य बोलने और धर्ममय आचरण की शिक्षा का मूल स्रोत वेद ज्ञान ही है।
सभा प्रधान चौधरी सत्यवीर आर्य ने कहा कि ऋषि जीवन द्वारा प्रदत्त ज्ञान और दर्शन के आधार पर वैदिक धर्म संसार का ज्ञान-विज्ञान से युक्त श्रेष्ठ मार्ग सिद्ध होता है। उन्होंने दूर-दूर से पधारे आर्य प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।

कुशल संचालन एवं उपस्थिति :
कार्यक्रम का कुशल संचालन आर्य सभा के मंत्री नरेन्द्र कुमार आर्य ने किया।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के. के. यादव, कृष्ण देव आर्य, प्रवीण आर्य, नरेश प्रसाद, सेवा राम त्यागी, प्रमोद चौधरी, हरवीर सिंह, गौरव आर्य, शिल्पा गर्ग, वंदना अरोड़ा, कौशल गुप्ता, वी. के. धामा, महिपाल तोमर, राजपाल तोमर, मोती लाल गर्ग सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
साभार – प्रवीण आर्य
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