सांख्य दर्शन के प्रवर्तक
महर्षि कपिल भारतीय संस्कृति और दार्शनिक परंपरा के महान ऋषि माने जाते हैं। वे सांख्य दर्शन के प्रवर्तक थे और उनके विचारों ने हिंदू, बौद्ध और जैन दर्शन को गहराई से प्रभावित किया।
परिचय और जन्म
महर्षि कपिल का जन्म लगभग 5000 वर्ष पूर्व माना जाता है। वे महर्षि कर्दम और मनु की पुत्री देवहूति के पुत्र थे। उनकी माता देवहूति अत्यंत धार्मिक और तपस्विनी थीं, जिन्होंने अपने पुत्र से ही आत्मज्ञान प्राप्त किया। कपिल को भगवान विष्णु का अवतार भी माना जाता है।
बौद्ध परंपरा में, महर्षि कपिल को गौतम ऋषि के वंशज के रूप में भी दर्शाया गया है।
सांख्य दर्शन का प्रवर्तन
महर्षि कपिल ने सांख्य दर्शन की स्थापना की, जो भारतीय दर्शनों में एक महत्वपूर्ण शाखा है। यह दर्शन प्रकृति (प्रक्रति) और पुरुष (चेतना) के द्वैत पर आधारित है और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बताता है।
सांख्य दर्शन के प्रमुख सिद्धांत
- द्वैतवाद – यह दर्शन प्रकृति और पुरुष को स्वतंत्र सत्ता मानता है।
- सृष्टि का सिद्धांत – संसार प्रकृति (मूल कारण) से उत्पन्न हुआ है, और इसमें त्रिगुण (सत्व, रज, तम) प्रमुख हैं।
- मोक्ष का मार्ग – सच्चे ज्ञान के द्वारा आत्मा और प्रकृति का भेद समझकर व्यक्ति मुक्ति प्राप्त कर सकता है।
- ईश्वर का निषेध – सांख्य दर्शन में ईश्वर के अस्तित्व को अनिवार्य नहीं माना गया है।
महर्षि कपिल और उनकी शिक्षा
महर्षि कपिल ने अपनी माता देवहूति को आत्मज्ञान प्रदान किया, जिसका वर्णन श्रीमद्भागवत पुराण के तृतीय स्कंध में मिलता है। उनके अनुसार, संसार दुखों से भरा हुआ है, और केवल सच्चे ज्ञान से ही आत्मा मुक्ति प्राप्त कर सकती है।
मुख्य शिष्य: आसुरी ऋषि

महर्षि कपिल के प्रमुख शिष्य आसुरी ऋषि थे, जिन्होंने उनके सांख्य दर्शन को आगे बढ़ाया। आसुरी ने इस ज्ञान को पंचशिख नामक शिष्य को दिया, जिससे यह परंपरा आगे विकसित हुई।
महर्षि कपिल का प्रभाव
महर्षि कपिल के विचारों का प्रभाव विभिन्न दार्शनिक परंपराओं पर पड़ा:
- हिंदू धर्म – भगवद्गीता में सांख्य दर्शन की महत्ता को स्वीकार किया गया है।
- बौद्ध धर्म – गौतम बुद्ध के सिद्धांतों में सांख्य दर्शन के कई तत्व देखे जा सकते हैं।
- जैन दर्शन – जैन दर्शन में भी आत्मा और प्रकृति के भेद पर जोर दिया गया है।
निष्कर्ष
महर्षि कपिल भारतीय दार्शनिक परंपरा के महान ऋषि थे। उनका सांख्य दर्शन आत्मा और प्रकृति के रहस्यों को समझाने वाला विज्ञान है। उनकी शिक्षा आज भी मानवता को सत्य और मोक्ष की ओर प्रेरित करती है।
महर्षि कपिल के पिता कर्दम ऋषि थे। आपकी माता का नाम मनुपुत्री देवहूति था। महर्षि कपिल का जन्म आज से लगभग 5000 वर्ष पूर्व का माना जाता है। आप महान् तेजस्वी ऋषि थे। बौद्ध सम्प्रदायियों के अनुसार महर्षि कपिल गौतम ऋषि के वंशज थे। आपके मुख्य शिष्य का नाम आसुरी था।










