यस्तर्केणानुसन्धत्ते स वेद नेतरः- मनुस्मृति
21 अगस्त 2024, बुधवार से प्रारम्भ
समयः- प्रात 7:00 से 8:00 बजे तक प्रतिदिन
प्रभुकृपा एवं गुरुजनों के अशीर्वाद से योग, सांख्य, वैशेषिक, उपनिषद्, वेदान्त के अध्यापन के पश्चात् महर्षि गौतम रचित न्याय दर्शन का अध्यापन प्रारम्भ किया जा रहा हैं। जो महानुभाव रुचि रखते हैं वे न्याय दर्शन की कक्षा में भाग ले सकते हैं।
न्याय दर्शन क्यों पढ़ें?
- 1. प्रमाणों को जानने एवं उनका ठीक उपयोग करना सीखने के लिए
- 2. संवाद / बातचीत करने की सही विधि सीखने के लिए
- 3. धर्म के तत्व (सत्य असत्य) का निश्चय करने के लिए
- 4. शास्त्र / वक्ता के अभिप्राय को समझने के लिए
- 5. मनन – निदिध्यासन करने की सही विधि जानने के लिए
- 6. तत्व की रक्षा तथा आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए

नियम एवं सूचनाएँ :-
- 1. न्याय दर्शन वात्स्यायन भाष्य सहित शंका समाधान पूर्वक पढ़ाया जायेगा ।
- 2. प्रत्येक अध्याय की समाप्ति पर ऑनलाइन परीक्षा भी रखी जायेगी, अध्ययन की समाप्ति पर
- उत्तीर्ण होने वालों को प्रमाणपत्र भी दिए जायेंगे।
- 3. आर्ष विद्या के अध्ययन-अध्यापन में संलग्न आचार्य जी को मासिक आर्थिक सहयोग राशि स्वेच्छानुसार रहेगी।
- 4. अध्ययन करने के इच्छुक सज्जनों को पंजीयन करना अनिवार्य होगा, पंजीयन के पश्चात् आपको
- व्हाट्सएप्प समूह में जोड़ दिया जायेगा जहाँ से आपको आगामी सभी सूचनाएँ प्राप्त होती रहेंगी।
- 5. सप्ताह में रविवार का अवकाश रहेगा, आवश्यकतानुसार अन्य दिन भी अवकाश रखा जा सकता है।
- 6. न्याय दर्शन पर स्वामी द्वारिकादास शास्त्री जी का भाष्य गौतम सूत्र वात्स्यायन भाष्य सहित मंगवा लेवे
पुस्तक खरीदने के लिए सम्पर्क करें श्री नीलेश पंवार 9886443807
सम्पर्क सूत्रः
श्री सुभाष आर्य- 9460385060 (W) श्री दिलीप वेलाणी – 9821377003 (W)









