भारत की प्राचीन शिक्षा पद्धति गुरुकुल प्रणाली केवल ज्ञान देने का माध्यम नहीं, बल्कि एक आदर्श जीवन निर्माण की प्रक्रिया रही है। इसी महान परंपरा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से सनातन वैदिक ट्रस्ट द्वारा महर्षि दयानंद वैदिक गुरुकुलम की स्थापना उत्तर प्रदेश के संभल जनपद में की जा रही है।
गुरुकुल का उद्देश्य
यह गुरुकुल उन बच्चों के लिए समर्पित है जो आर्थिक रूप से कमजोर, शोषित या शिक्षा से वंचित हैं। यहाँ विद्यार्थियों को केवल आधुनिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि वैदिक ज्ञान, संस्कार और आत्मनिर्भर जीवन जीने की शिक्षा भी दी जाएगी।
- वैदिक शिक्षा एवं संस्कार
- आयुर्वेद, योग और धनुर्वेद का प्रशिक्षण
- नैतिक एवं आध्यात्मिक विकास
- राष्ट्र और समाज के प्रति जिम्मेदारी
स्थान और विशेषताएँ
यह गुरुकुल ग्राम ढाकरी, पोस्ट बहजोई, जिला संभल (उत्तर प्रदेश) में चंदौसी-मुरादाबाद राजमार्ग के पास स्थापित किया जा रहा है।
इसका लक्ष्य है:
- श्रेष्ठ आचार्य, विद्वान और समाजसेवी तैयार करना
- वैदिक संस्कृति का संरक्षण और प्रचार
- एक सशक्त एवं संस्कारित समाज का निर्माण
महर्षि दयानंद सरस्वती की प्रेरणा
महर्षि दयानंद सरस्वती ने वेदों की ओर लौटने का संदेश देकर भारतीय समाज को नई दिशा दी। यह गुरुकुल उन्हीं के आदर्शों पर आधारित है, जो ज्ञान, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
आपका सहयोग क्यों आवश्यक है
गुरुकुल निर्माण एक महायज्ञ है, जिसमें समाज के हर वर्ग का योगदान आवश्यक है। आपका सहयोग न केवल एक बच्चे का भविष्य बनाएगा, बल्कि पूरे राष्ट्र के उत्थान में सहायक होगा।
दान की श्रेणियाँ
- वार्षिक सदस्य: ₹12,000
- एक बच्चे का पालन-पोषण: ₹21,000
- विशेष सदस्य: ₹51,000
- आजीवन सदस्य: ₹1,00000
दान पर आयकर अधिनियम की धारा 80G और 12A के अंतर्गत छूट उपलब्ध है।
कैसे करें सहयोग
बैंक विवरण:
इंडियन बैंक, शाखा: बहजोई, संभल (उत्तर प्रदेश)
IFSC कोड: IDIB000B713
संपर्क सूत्र
9027202341, 9410293304
समापन
“सौ हाथों से कमाओ और हजार हाथों से दान करो” — यह वैदिक संदेश केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक जीवन पद्धति है।
आइए, हम सभी इस पवित्र कार्य में सहयोग देकर सनातन संस्कृति और वैदिक शिक्षा को पुनर्जीवित करें।
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