महर्षि दयानंद सरस्वती बोध पर्व का भव्य समापन: पड़री

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Rishi Bodhotsav

वैदिक परंपराओं के साथ हुआ भव्य आयोजन का समापन

📅 दिनांक: 26 फरवरी 2025 (बुधवार)
📍 स्थान: शिव मंदिर प्रांगण, ग्राम पड़री, बेल्थरा-सोनाडीह मार्ग, उत्तर प्रदेश

ग्राम पड़री, बेल्थरा रोड स्थित शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित महर्षि दयानंद सरस्वती बोध पर्व का आयोजन भव्य रूप से संपन्न हुआ। इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, आर्य वीर दल के कार्यकर्ता, विद्वान, शिक्षक, और समाज के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इस शुभ अवसर पर सभी ने वेदों के प्रकाश में मानव जीवन के उत्थान का संदेश ग्रहण किया और महर्षि दयानंद सरस्वती जी के विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।


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कार्यक्रम का शुभारंभ

सुबह के सत्र में कार्यक्रम की शुरुआत गायत्री मंत्र पाठ से हुई, जिसके पश्चात श्रद्धालुओं ने आचमन, अंगस्पर्श एवं संकल्प पाठ किया। इसके बाद ईश्वर स्तुति, प्रार्थना एवं उपासना के माध्यम से सभी ने ईश्वरीय आशीर्वाद प्राप्त किया।

🔹 स्वस्तिवाचन के पश्चात, कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ दीप प्रज्वलनम के साथ हुआ।
🔹 प्रातः और सायं कालीन मंत्र पाठ एवं पूर्णाहुति का आयोजन वैदिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया।
🔹 शांतिपाठ के पश्चात श्रद्धालुओं ने महर्षि दयानंद सरस्वती के गुणगान में भजन संध्या का आनंद लिया।

विशेष रूप से, पं. लालमणि आर्य जी ने अपनी स्वरचित रचना के माध्यम से महर्षि दयानंद सरस्वती के गुणगान किए, जिसे सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो गए।

उन्होंने कहा कि किसी भी अच्छे उद्देश्य को प्राप्त करने के मार्ग में रुकावटें अवश्य आती हैं, लेकिन यदि संकल्प मजबूत हो तो इन चुनौतियों को अवसर में बदला जा सकता है। वैदिक वांग्मय में इस संकल्प शक्ति को “शिव संकल्प” कहा गया है।

उन्होंने महर्षि दयानंद सरस्वती के जीवन से प्रेरणा लेने का आग्रह किया, जिन्होंने अपने अटूट संकल्प और उच्च उद्देश्यों के कारण एक साधारण मूलशंकर से महान विचारक महर्षि दयानंद बनने की यात्रा तय की। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे भी इस ऋषि बोध दिवस पर अपने जीवन के लिए कुछ सार्थक और समाजोपयोगी संकल्प लें।

उन्होंने महाशिवरात्रि पर्व का असली अर्थ बताया।


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विद्वानों के ओजस्वी विचार

समारोह में उपस्थित क्षेत्रीय विद्वानों, समाजसेवियों एवं अतिथियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए और महर्षि दयानंद सरस्वती जी के योगदान को स्मरण करते हुए समाज में वैदिक संस्कृति के प्रचार-प्रसार पर बल दिया।

यज्ञ कार्यक्रम में लगभग 50 श्रद्धालु सम्मिलित हुए और सभी ने कार्यक्रम की भूरि-भूरि प्रशंसा की।


सायंकालीन ऋषि लंगर एवं प्रसाद वितरण

🔸 यज्ञ के पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया, जिसे ग्रहण कर सभी ने आध्यात्मिक शांति एवं संतोष अनुभव किया।
🔸 सायंकालीन ऋषि लंगर का विशेष आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 100 लोगों ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया।

श्रद्धालुओं ने इस आयोजन की भव्यता एवं व्यवस्था की प्रशंसा की और आयोजन समिति को धन्यवाद दिया।

रूपचन्द जी आर्य,अजय शर्मा,अश्वमेध शर्मा,रविन्द्र जी,रवीश जी,श्रवण मौर्य जी, रामजन्म मौर्य जी,अशोक कुमार मौर्य,रविन्द्र पासवान जी, आचार्य संतोष कुमार, लल्लन शर्मा , आदि अनेक सदस्य इस कार्यक्रम में उपस्थितहकर


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वेदों की ओर लौटो, सत्य की राह अपनाओ!

इस भव्य आयोजन ने समाज में वैदिक संस्कृति और सत्यमार्ग को पुनः जीवंत करने का संदेश दिया। श्रद्धालुओं ने महर्षि दयानंद सरस्वती जी के बताए गए वैदिक सिद्धांतों को अपनाने का संकल्प लिया।

🚩 वेदों की जय! धर्म की जय! सत्य की जय! 🚩

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