महर्षि दयानंद बोधोत्सव का आयोजन संपन्न – आर्य वीरांगना दल बलिया द्वारा प्रेरणादायी कार्यक्रम
आर्य वीरांगना दल के तत्वावधान में महर्षि दयानंद बोधोत्सव का पावन आयोजन महाशिवरात्रि के अवसर पर 15 फरवरी 2026, रविवार, अपराह्न 3:30 बजे, रानी लक्ष्मीबाई शाखा, शेरवां कलां, बलिया में संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम आचार्य ज्ञान प्रकाश वैदिक जी के निर्देशन में आयोजित किया गया, जिसमें वैदिक परंपरा, राष्ट्र सेवा और समाज जागरण का संदेश प्रमुख रहा।
कार्यक्रम की शुभ शुरुआत यज्ञ के साथ :
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक रीति से यज्ञ के साथ हुआ। यज्ञ में ब्रह्मा के रूप में सुश्री राधा आर्या उपस्थित रहीं। यज्ञोपरांत उन्होंने यज्ञ के अनेक लाभों एवं “यज्ञ क्यों करना चाहिए” विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। यज्ञ प्रार्थना के साथ कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया, जिससे वातावरण पूर्णतः वैदिक एवं आध्यात्मिक बन गया।
मुख्य अतिथि का प्रेरणादायी संबोधन :
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री राजेश आर्य जी ने सभी वीर-वीरांगनाओं एवं अभिभावकों को आहार, दिनचर्या, व्यवहार एवं संस्कारों पर गहन चर्चा के माध्यम से मार्गदर्शन प्रदान किया। उनके वक्तव्य ने उपस्थित जनों को अपने जीवन में अनुशासन और सदाचार अपनाने के लिए प्रेरित किया।
भजन एवं वैचारिक उद्बोधन :
राधा आर्या ने “ऋषि की महिमा कितनी निराली है” नामक मनमोहक भजन के माध्यम से ऋषि के जीवन और उनके आदर्शों को भावपूर्ण प्रस्तुति दी।
विपिन आर्य ने सनातन की परिभाषा स्पष्ट करते हुए सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों पर प्रभावशाली व्याख्यान दिया, जिससे उपस्थित जनसमूह को वैदिक धर्म की गहराई समझने का अवसर मिला।

संचालन एवं प्रेरणादायक संदेश :
कार्यक्रम का संचालन विवेक आर्य (सागर) जी द्वारा किया गया। उन्होंने विपिन आर्य के विचारों का उपसंहार करते हुए शालू आर्या से प्रश्न किया कि आर्य वीरांगना दल एवं आर्य समाज से जुड़ने के बाद उनके जीवन में क्या परिवर्तन आया। शालू आर्या ने अपने अनुभवों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से साझा किया।
सागर जी ने ऋषि के जीवन एवं उनके महान कार्यों पर प्रकाश डालते हुए समाज को ऋषि के पथ पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज समाज में वैदिक विचारों की अत्यंत आवश्यकता है और प्रत्येक युवक–युवती को राष्ट्र सेवा रूपी अभियान से जुड़कर समाज में फैले अज्ञान एवं भ्रमरूपी अंधकार को समाप्त करना चाहिए।

आर्य समाज के महत्व पर विशेष प्रकाश :
संध्या मंत्रों के साथ-साथ आर्य समाज के सिद्धांतों, नियमों एवं महत्व को बताया गया। साथ ही, आर्य वीर दल एवं आर्य वीरांगना दल की दैनिक शाखा लगाने के लिए सभी को प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के समापन सत्र में सागर जी ने समाज और राष्ट्र के प्रति सदैव समर्पित भाव रखने का ऊर्जावान संदेश दिया।
उपस्थिति एवं समापन :
इस प्रेरणादायी कार्यक्रम में 25 वीरांगनाओं एवं 10 वीरों की सहभागिता रही। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ, जय घोष एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
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