इन दोनों वीर आत्माओं ने आर्य जाति और आर्य धर्म की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी। ये धर्मवीर भी बलिदान की उस पुण्य परंपरा के उज्ज्वल दीप हैं, जिन्होंने मातृभूमि और सत्य सनातन धर्म की सेवा में अपने प्राणों को अर्पित कर दिया।
अत्यंत खेद की बात है कि अनेक प्रयासों के पश्चात भी न तो श्रीमती आर्य प्रतिनिधि सभा, सिंध द्वारा और न ही किसी अन्य सज्जन द्वारा इन महावीरों का जीवनवृत्त उपलब्ध कराया जा सका।










