लूटा था जमाने ने ऋषिवर ने बचाया है
अपने गुरु विरजानन्द का वचन निभाया है ॥ लूटा था…
भ्रमजाल में लोगों को बहकाया मक्कारों ने
अन्याय पाप पाखण्ड से दयानन्द ने छुड़ाना है ॥ लूटा था…
निर्जीव आर्य जाति में नव प्राण फूँके ऋषि ने
सौ बार उठाया है सो बार बचाया है ॥ लूटा था…
नारी का नहीं था मान गौओं को सताया था
दयानन्द दया सिन्धु तारक बन आया है ॥ लूटा था…
क्या सत्य था क्या था असत्य लोगों को पता न था
सत्यार्थ प्रकाश रचा अज्ञान मिटाया है ॥ लूटा था…
गुरुकुल और आर्य समाज सींचा था ऋषिवर ने
आदर्श के फूलों से आँगन महकाया है ॥ लूटा था…
जो कुछ था ऋषि ने संग जब बाँट दिया जग को
हँस के दिए प्राण, क्षमा घातक को दे आया है ॥ लूटा था…
इस युग में नहीं है कोई महर्षि दयानन्द सा
निष्काम कर्म ऋषि का, हर मन में समाया है ॥ लूटा था…










