लक्ष्मीबाई चढ़ी अश्व हर खड़ी देइ हुंकार।

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लक्ष्मीबाई चढ़ी अश्व हर खड़ी देइ हुंकार।

लक्ष्मीबाई चढ़ी अश्व
हर खड़ी देइ हुंकार।
जालिमो हट जाना ।।

झाँसी की आजादी देवी
कभी नहीं जाने दूंगी।
अपने होते हुए गुलामी
हरगिज नहीं आने दूर्गी।।
मिट जाऊंगी अपने वतन
पर खोल लिये थे केश।। जालिमो०

हटे नहीं अँग्रेज
उतर कर फौरन नीचे आती है।
झाँसी की रज को लेकर
के माथे बीच लगाती है।।
आँखे करके लाल बनाइ
लिया दुर्गा का सा वेश।। जालिमो०

केश बखेर पीठ
से बाँधा दामोदर अपना बेटा।
हंसते रहना समर के अन्दर
ओ३म् नाम जपना बेटा ।।
भली करे भगवान् उठी है
आजादी की ठेस।। जालिमो०

लई-गिन तलवार
हाथ में आगे बढ़ी जो क्षत्रानी।
मार काट करती हुई देखो
स्वर्ग सिधार गई रानी ।।
‘ज्ञानेन्द्र’ प्रकाश तेरा यश
गाता सारा देश।। जालिमो०