लागी रे लगन मुझको प्रभु के मिलन की
प्रभु की कृपा बिन न मुक्ति जीवन की ॥ लागी रे…
न देना प्रभु मोह-माया में फँसने
भटकने लगूँ तो मुझे करना बस में
न जानूँ प्रभु रीत मन के दमन की ॥ लागी रे…
ना पापों से मन जाए कभी अनुपतन में
हो मन ‘सुमना’ जाए धर्माचरण में
रहे मन में वृत्ति तेरे अनुसरण की ॥ लागी रे…
जहाँ तू रखे दाता खुश हूँ जीवन में
खिजा खार निर्जन सहर या चमन में
जहाँ भी रहूँ बनके धूल चरण की ॥ लागी रे…
जनम चक्र में घूमता ही रहा हूँ
समझ ना सका दाता मैं कब कहाँ हूँ
न इच्छा प्रभु मुझको आवागमन की ॥ लागी रे…
रहे याद तेरी प्रभु दुःख या सुख में
न मैं मैं रहूँ और समाऊँ में तुझमें
न तन की रहे सुध, रहे सुध न मन की ॥ लागी रे…
जो होवें विदा प्राण जब मेरे तन से
प्रभु नाम निकले मेरे मुख से मन से
है मुझको प्रभु आस तेरी शरण की ॥ लागी रे…
(खिजाँ) पतझड़ (सुमना) अच्छे मनवाला (अनुसरण) पीछे जानेवाला (धर्माचरण) धार्मिक, धर्म का
आचारण (सदुप्रदेश) सत्य का उपदेश










