क्यूँ ढूँढ़ रहा जग में हृदय में प्रभु रहते
आनन्द स्रोत ईश के यहाँ बहते ही रहते ॥
दुष्कर्म के जंगल में मिले काँटे ही काँटे
सत्कर्म के बागों में खिले फूल ही रहते ॥ क्यूँ…
ईश्वर ने रचा जगत जीवमात्र के लिए
ये भेद जानते तो पर उपकार में रहते ॥ क्यूँ…
पा लेते प्रभु तुझसे तेरे प्रेम के मोती
इन मोतियों को जग में सदा बाँटते रहते ॥ क्यूँ…
करने को बहुत कुछ था अगर करने पे आते
हम धर्म अर्थ काम मोक्ष के लिए रहते ॥ क्यूँ…
तर्ज: उनको ये शिकायत है के










