क्या करूँ जीवन, तेरे बिना, दयानिधान

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क्या करूँ जीवन, तेरे बिना, दयानिधान

दीप जले, ज्ञान के, जब किया, तेरा ध्यान ॥ क्या क…

मैं राह देखूँ तेरी निज मन के द्वार पे

और इन्तजार में पल पल गुजरे

आके दरस दिखा दे मेरे मन के दर्पण में

तेरी याद में भुला हूँ, मैं सुध अपनी ॥ क्या करूँ…

मैं एक वस्तु माँगू तू कई हजार दे

बदले में कुछ न माँगे प्रभु तू इसके

क्या वस्तु मेरी तुझको मैं दूँ उपहार में

करूँ भेंट प्रार्थना स्तुति श्रद्धा भक्ति ॥ क्या करूँ…

तुझमें दया है जितनी उतना ही प्यार है

ऋषि साधु सन्त योगी तुझको भजते

आया शरण मैं तेरी चरणों में स्थान दे

मन की व्यथा प्रभुजी होगी सुननी ॥ क्या करूँ…

जीवन प्रभुजी मेरा तुझपे निसार है

पाने को प्रेम तेरा ये मन तरसे

दिया जान को जला तू अद्भुत प्रकाश दे

अनबुझ रहे ये मन की जलती अग्नि ॥ क्या करूँ…

(सन्ताप) कष्ट, पीड़ा, (अनबुझ) जो बुझ न सके, (निसार) न्यौछावर, समर्पण

तर्ज क्या जानूँ सजन होती है क्या