क्या गजब आसार बनते जा रहे

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क्या गजब आसार बनते जा रहे

क्या गजब आसार
बनते जा रहे,
कैसे ये नर-नार
बनते जा रहे।

जिन्दगी अनमोल थी
‘बेमोल’ ये,
आज जीवन भार
बनते जा रहे….।

सींचकर गुलशन
खिलाए गुल कभी,
आज वो गुल खार
बनते जा रहे….।

धर्म ढूंढ़े से कहीं
मिलता नहीं,
पाप के बाजार बनते
जा रहे….।

जल न जाए विश्व
सारा एक दिन,
रात दिन हथियार
बनते जा रहे….।

गैरों से शिकवा
करें क्या आज हम,
दोस्त भी गद्दार बनते
जा रहे….।

कौन माँ की लाज
की रक्षा करे,
सन्त भी खुंखार
बनते जा रहे….।

करते थे शीतल
हृदय औरों के जो,
आज वो अंगार बनते
जा रहे….।

जितने डाकू और
लुटेरे हैं यहाँ,
मिनिस्टरों के यार
बनते जा रहे….।