कोटि कोटि रूप तेरे कोटि कोटि नाम तिहारे

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कोटि कोटि रूप तेरे कोटि कोटि नाम तिहारे

तेरी ज्योति से है रोशन सूर्य चन्द्र अगणित तारे ॥ कोटि..

दिव्य अंकुरों में ईश्वर तेरा ही वास

फूलों में सुगन्ध लताओं में तेरा उल्लास

सकल धरा पर मधुमास के प्रभु सरजन हारे ॥ कोटि…

लोक में लोकान्तर में प्रभु तेरा ही प्रकाश

परम ज्ञानी पाते तुझसे ज्योति-प्रसाद

देव जो समर्पित तुझ पर करें स्तुति तुझे पुकारें ॥ कोटि…

जो भी भक्त करता तुझ पर पूर्ण विश्वास

तेरे दर से जाए ना वो कभी खाली हाथ

दोष रहित मन में दर्शन देते प्रभु पावन प्यारे ॥ कोटि…

पड़ा सुना मन मन्दिर दो ज्ञान का प्रकाश

प्रेम दान देकर मन में करो सहवास

हर एक श्वास तेरा ऋणी कैसे तेरा ऋण उतारें? ॥ कोटि…

(दिव्य) महान (अंकुर) बीज फूटी कपल (उल्लास) प्रसन्नता (लोक) भुवन

तर्ज: कोटि कोटि रुपे तुझी