वैराग्य
किसी दिन देख लेना,
तुझको ऐसी नींद आएगी।
तू सोया फिर ना जागेगा,
तुझे दुनियाँ जगाएगी।।
तुझे संसार के खूँटे से,
जिसने बाँध रक्खा है।
तेरे सोते ही ममता की,
वो रस्सी टूट जाएगी।।
किसी दिन देख लेना तुझको ……..
तेरे घर वाले जिस सूरत से,
इतना प्यार करते हैं।
यही सूरत उन्हें फिर,
भूत बन करके डराएगी।।
किसी दिन देख लेना तुझको …….
तेरी हस्ती को जिस खलकत,
ने पस्ती में गिराया है।
वो ही बेकदर दुनिया,
तुझको कंधों पर बिठाएगी।।
किसी दिन देख लेना तुझको ……
तू आँखे फेरेगा तो,
दुनियाँ भी मुँह फेर जाएगी।
जो आँखों पर बिठाती थी,
वो ही आँखे दिखाएगी।।
किसी दिन देख लेना तुझको ……..
जो कहते थे मरेंगे साथ,
वो थोड़े कदम चलकर।
वो मोह मटकी भी तिनके,
तोड़ते ही टूट जाएगी।।
किसी दिन देख लेना तुझको …….
जिन्हें समझा है ‘नत्थासिंह’,
वो तो लौट जाएंगे।
तेरी नेकी बदी ही,
अन्त में तेरे काम आएगी।।
किसी दिन देख लेना तुझको………










